प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया / चतुर्थी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 31 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण
*१८५८ वां* सार -संक्षेप
मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३४०
आचार्य जी प्रयास करते हैं कि हम बिना दंभ और पाखंड के यशस्विता प्राप्त करें l अतः इन वेलाओं का श्रवण कर हम दंभ, पाखंड आदि विकारों का निरसन करते रहें l
परमात्मा की असीम कृपा है कि हम भारतवर्ष जैसे अद्भुत और अप्रतिम परिक्षेत्र में जन्मे हैं। अनन्त देवी-देवताओं का वरदहस्त हम पर है और ऋषियों-मुनियों की यज्ञमयी परम्परा की विरासत हमें प्राप्त हुई है।
विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत और अपनी-अपनी विशिष्ट रुचियों एवं प्रतिभाओं को धारण करने वाले हम युगभारती के सदस्यों के हृदय में भारतमाता के प्रति एक गहरा आत्मीय भाव है। हमारी विविधता के बीच हमें एक सूत्र में बाँधने वाली शक्ति है—राष्ट्र के प्रति समर्पण और भारत की सनातन जीवन-दृष्टि के प्रति आस्था।
इसी आत्मीय भावभूमि पर पण्डित दीनदयाल उपाध्याय जी के विचारों के पल्लवन और प्रसार की एक उदात्त परिकल्पना हमारे सामने है। हमारा उद्देश्य केवल उनके विचारों का अध्ययन करना नहीं, बल्कि उन्हें अपने जीवन, व्यवहार और सामाजिक कार्यों में उतारते हुए समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुँचाना है।
हम मानते हैं कि विचार तभी सार्थक होते हैं, जब वे जीवन का हिस्सा बनें और समाज के लिए प्रेरणा तथा परिवर्तन का आधार बनें। युगभारती इसी भाव से विविध क्षेत्रों में सक्रिय व्यक्तियों को आगामी अधिवेशन में एक साथ लाकर राष्ट्र, समाज और संस्कृति के प्रति अपनी भूमिका को अधिक सार्थक बनाने का प्रयास करने जा रही है
भारत में समय-समय पर ऐसे महापुरुष अवतरित हुए हैं जिन्होंने भारत की आत्मा को शब्द, विचार और आचरण के माध्यम से जन-जन तक पहुँचाया।
गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस, जिसमें ज्ञान की गरिमा भक्ति की गहराई और चिन्तन का उत्तुंग शिखर है,के माध्यम से इसी भारत-चिति को लोकभाषा में अभिव्यक्ति दी l
दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा॥
सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती॥1॥
रामराज्य केवल अच्छी शासन-व्यवस्था का नाम नहीं है। वह ऐसी सामाजिक व्यवस्था है जिसमें व्यक्ति स्वस्थ और सुखी हो,समाज प्रेममय हो,
प्रकृति संतुलित हो और प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्य का पालन करे।
इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने और क्या बताया,कल सम्पन्न हुए कार्यक्रम के विषय में क्या बताया, एक दिन जागने का एक दिन सोने का किन भैया का होता है,जानने के लिए सुनें l