17.1.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ कृष्ण पक्ष चतुर्दशी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 17 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण

 मैं व्यक्ति नहीं अपने कुटुम्ब की थाती हूं 

हर संकट का हल और वज्र की छाती हूं


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ कृष्ण पक्ष चतुर्दशी विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 17 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१६३३ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ११५


अध्ययन स्वाध्याय में रत हों


जब मनुष्य अंतर्मुख होकर अपनी अंतरात्मा की वाणी को सुनता है, तब उसे यह साक्षात्कार होता है कि उसका वास्तविक स्वरूप केवल यह नश्वर शरीर या सीमित व्यक्तित्व नहीं है। उसे अनुभूति होती है कि मूलतः वह तत्त्व है शक्ति है विश्वास है वह तो अनन्त वैभव है

हम भी इसी तत्त्व शक्ति की अनुभूति करें हम अनुभव करें कि हम अनन्त वैभव हैं और गर्व करें कि हम उस महान् भारतीय सनातनधर्मी समाज की थाती हैं अर्थात् उसकी परम्पराओं, मूल्यों और सांस्कृतिक धरोहर के संवाहक हैं हमारा अस्तित्व व्यक्तिगत स्वार्थ तक सीमित नहीं, बल्कि अपने कुटुम्ब रूपी समाज की रक्षा, सेवा और उन्नति से संयुत है।

जब समाज पर संकट आयेगा तब हम समाधान का संकल्प लेकर आगे चलेंगे धर्म, सत्य और न्याय के मार्ग पर अडिग रहकर प्रत्येक चुनौती का उत्तर देंगे अधर्म और दुष्ट प्रवृत्तियों के समक्ष हमारा हृदय न भयभीत होगा न विचलित l यह संभव है भावना के समर्पण से  l इसके लिए प्रातः काल का जागरण अनिवार्य है l हम अध्ययन स्वाध्याय संपर्क में रत हों किसी सार्थक विषय को केंद्र में रखकर बैठकें करें

किसी भी क्षेत्र में धनार्जन कर रहे हों अपनी परंपराओं को जानें अपने मूल को जानें l अतीत का ज्ञान हमें उसके सम्मान के लिए सक्षम बनाता है l भविष्य के लिए संकल्प करें l देश दर्शन से अपने देश की विविधता विचित्रता की जानकारी होगी l अतः देश का भ्रमण अवश्य करें l


इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने भाईसाहब के पूर्त कार्य की चर्चा की,उन्नाव विद्यालय के लिए हम क्या कर सकते हैं, भैया पुनीत जी,भैया अमित गुप्त जी,भैया बलराज जी,दादा गुरु, प्रेमानन्द, निर्मल बाबा का उल्लेख क्यों हुआ सोनी जी के किस भाषण की आचार्य जी ने चर्चा की जानने के लिए सुनें l