16.1.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 16 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण *१६३२ वां* सार

 प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 16 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१६३२ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ११४

शौर्य प्रमंडित अध्यात्म की अनुभूति आवश्यक है उत्साहपूर्वक उत्थित होने की आवश्यकता है

एकांत में बैठकर अंतर्निहित ऊर्जा की अनुभूति करें


जो व्यक्ति इस संसार के सत्य को नियमपूर्वक, तर्क और विवेक के आधार पर भली-भाँति समझ लेता है, वही वास्तव में भारत माता का सच्चा सेवक कहलाने योग्य होता है। प्रत्येक व्यक्ति को अपनी अंतर्निहित शक्ति का बोध करना आवश्यक है। शारीरिक, मानसिक और नैतिक दुर्बलता राष्ट्र और समाज की प्रगति में बाधक होती है, अतः शक्ति के शैथिल्य से बचकर आत्मबल, साहस और संकल्प को सुदृढ़ बनाए रखना चाहिए।

भगवान् श्रीकृष्ण ने अर्जुन को विराट् रूप इसलिए दिखाया ताकि अर्जुन के मन में उत्पन्न संशय, मोह और भय का पूर्णतः निवारण हो सके तथा वह सत्य, कर्तव्य और परम शक्ति को प्रत्यक्ष रूप में समझ सके। अर्जुन को प्राप्त हुई यह शक्ति की दृष्टि उसके लिए अत्यन्त लाभकारी सिद्ध हुई l


नई पीढ़ी को सत्य का बोध कराने के प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं। उनके मन में व्याप्त भय, संशय और भ्रम को दूर करने का कार्य चल रहा है तथा उन्हें यह समझाया जा रहा है कि भारतीय जीवन-दर्शन, उसके विचार और संकल्प न तो समाप्त हुए हैं और न ही लुप्त हुए हैं। वे आज भी जीवंत हैं और हमारे समाज में गहराई से विद्यमान हैं।

भारतीय संस्कृति में जीवन को देखने की एक समग्र और संतुलित दृष्टि है, जो सत्य, कर्तव्य, आत्मबल और समर्पण पर आधारित है।



डा एम. वी. गोविन्दस्वामी जो अखिल भारतीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (AIIMH) के संस्थापक-निदेशक थे, जिसे बाद में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS), बैंगलोर के रूप में जाना जाने लगा का उल्लेख क्यों हुआ,भारतीय संगीत ऊर्ध्वगामी होने के कारण क्यों महत्त्वपूर्ण है  भैया प्रशान्त बोडस जी भैया संदीप बोडस जी भैया सौरभ राय जी की चर्चा क्यों हुई जानने के लिए सुनें