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13.11.23

आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अमावस्या / शुक्ल पक्ष प्रतिपदा विक्रम संवत् 2080 तदनुसार 13 नवम्बर 2023 का सदाचार संप्रेषण *837 वां*

 प्रस्तुत है उदारमनस् ¹  आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का आज  कार्तिक मास कृष्ण पक्ष अमावस्या / शुक्ल पक्ष प्रतिपदा विक्रम संवत् 2080  तदनुसार 13 नवम्बर 2023 का  सदाचार संप्रेषण 

  *837 वां* सार -संक्षेप


 1  विशालहृदय


शरीर बहुत अद्भुत है जहां इसमें विकार हैं तो विचार भी हैं निराशा हताशा है तो बुद्धि शक्ति भी है शरीर समस्या  है तो  माध्यम भी है

 शरीर बहुत सी शक्तियों को प्राप्त कर भगवान् की कृपा से उसकी अनुभूति करा देता है

इसका एक उदाहरण वृन्दावन के श्रीहित प्रेमानंद महाराज जी हैं अति विनम्र हैं राधा भक्त हैं और उनके देश भर में लाखों की संख्या मेंअनुयायी हैं

करीब अठारह साल से उनके दोनों गुर्दे खराब हैं और उनकी नियमित डायलिसिस होती है फिर भी वे कार्यरत हैं

संसार गुणों से आकर्षित होता है और उन्हीं गुणों को चमत्कार मान लेता है

अद्भुत है संसार



तपबल रचइ प्रपंचु बिधाता। तपबल बिष्नु सकल जग त्राता॥

तपबल संभु करहिं संघारा। तपबल सेषु धरइ महिभारा॥2॥



तप के बल द्वारा ही ब्रह्मा जी सत्य और असत्य को मिलाकर संसार को रचते हैं और उसी बल से विष्णु जी सारे जगत् का पालन करते हैं। तप के बल से ही शिव जी जगत् का संहार करते हैं और तप के बल से ही शेष जी धरती मां का भार धारण करते हैं


इसी संसार में भारत देश में तो बहुत अद्भुतता है

मनुष्य का सहज अविश्वासी स्वभाव होता है तो उसे लगता है यह सच है या नहीं


विश्वास करें भारत सचमुच में अद्भुत देश है

जो जितना अविश्वासी है उतने ही संकटों से घिरा रहता है

अविश्वासी तर्कप्रेमी होते हैं

मनुष्य जीवन की यही विशेषता है कि वह सब कुछ है और कुछ भी नहीं है

कर्म के रहस्य को समझने पर  मनुष्य का जीवन विशिष्ट हो जाता है


भक्ति बहुत शक्ति देती है भक्ति में स्वार्थ नहीं होना चाहिए


तुलसीदास जी का जीवन अनेक संकटों में बीता

और जब उनपर कृपा हुई


तदपि कही गुर बारहिं बारा। समुझि परी कछु मति अनुसारा॥

भाषाबद्ध करबि मैं सोई। मोरें मन प्रबोध जेहिं होई॥


जस कछु बुधि बिबेक बल मेरें। तस कहिहउँ हियँ हरि के प्रेरें॥

निज संदेह मोह भ्रम हरनी। करउँ कथा भव सरिता तरनी॥

तो रघुनाथ की अद्वितीय अप्रतिम कथा की रचना कर दी



तुलसीदास जी को वाल्मीकि जी महाराज का अवतार भी कहा जाता है आजकल लोग वाल्मीकि जी को पता नहीं क्या क्या बता देते हैं 

कलियुग में पाखंड अविश्वास छल कपट का बोलबाला है

ऐसे घोर कलियुग में हम यदि कुछ समय के लिए ये सदाचारमय विचार सुनते हैं तो यह भगवान् की कृपा है


भक्ति विलक्षण है शौर्य शक्ति पराक्रम का आधार यदि भक्ति है तो यह मंगलमय   और  फलप्रद  है


आचार्य जी ने किस प्रसंग में बताया कि कब्जा करने की नीति सही नहीं है और  कब्जा छुड़वाना कैसे रामत्व है जानने के लिए सुनें



26.2.23

¹आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का फाल्गुन शुक्ल सप्तमी विक्रम संवत् 2079 तदनुसार 26 -02- 2023 का सदाचार संप्रेषण

 श्रोता बकता ग्याननिधि कथा राम कै गूढ़।

किमि समुझौं मैं जीव जड़ कलि मल ग्रसित बिमूढ़॥ 30(ख)॥


प्रस्तुत है  निष्ण ¹आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का आज 

फाल्गुन शुक्ल सप्तमी विक्रम संवत्  2079

तदनुसार 26 -02- 2023

का  सदाचार संप्रेषण 

 

https://sadachar.yugbharti.in/


  577 वां सार -संक्षेप

1 = चतुर, विशेषज्ञ


स्थान :चित्रकूट

(यहां प्रभु राम लम्बे समय तक ऋषियों के बीच में रहे हैं और यहां के सारे संकटों को दूर किया है )

श्रोता बकता ग्याननिधि कथा राम कै गूढ़।

वह  गूढ़ तत्व राम तत्व है जिसे तुलसीदास जी ने व्यक्त किया है 

जो प्राणी परमात्म अंश की अनुभूति करते हैं वे सारे के सारे एक आदर्श जीवन की व्याख्या 'रामकथा' से अनुप्राणित हैं जो प्राणी अपने को मात्र जीव मानते हैं उनकी बात अलग है

ये भारतवर्ष को मात्र एक भूमि का   टुकड़ा मानते हैं वे कहते हैं यह तो 

भोगभूमि है

जो भावभूमि वाले हैं उनके लिये भारत मातृभूमि धर्मभूमि है 


तुलसी द्वारा कराया गया परिवार बोध अद्वितीय है स्थान स्थान पर ऐसे प्रसंग हैं जहां इस परिवार के व्यवहारिक स्वरूप को उन्होंने चित्रित किया है

जब कि स्वयं तुलसी का परिवार कभी रहा नहीं

आइये चलते हैं  शक्ति जाग्रत करने के लिये आत्मकल्याण के लिये राम तत्व की अनुभूति करते हुए उत्तर कांड में

महासंकट रावण को समाप्त कर पुष्पक विमान से प्रभु राम अयोध्या आ गये हैं

प्रभु राम मर्यादा पुरुषोत्तम आदर्श पुत्र आदर्श भाई आदर्श राजा भी हैं और हवि से जन्मे परमात्मा भी हैं 


धाइ धरे गुर चरन सरोरुह। अनुज सहित अति पुलक तनोरुह॥

भेंटि कुसल बूझी मुनिराया। हमरें कुसल तुम्हारिहिं दाया

॥2॥


गुरु वशिष्ठजी ने  उन्हें गले लगाकर कुशलक्षेम पूछा 

प्रभु राम ने कहा- आपकी दया में ही हमारी कुशलता है


(आचार्य जी ने उर्मिला का 

पातिव्रत्य विश्वास संबन्धी प्रसंग भी बताया)

अब भगवान् राम का राजतिलक होने जा रहा है


आचार्य जी ने यह भी बताया कि कैकेयी ने सामान्य जीवन किस प्रकार प्रारम्भ किया है

रामराज्य को तैयार करने में प्रभु राम लक्ष्मण भरत शत्रुघ्न कैकेयी कौशल्या सुमित्रा सीता मांडवी उर्मिला श्रुतिकीर्ति  हनुमान जी आदि का सहयोग रहा है


एक एक व्यक्ति स्वार्थ से दूर तपोनिष्ठ रहा है