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17.1.22

 जैसी बहे बयार, पीठ तब तैसी दीजै"


प्रस्तुत है आर्थिक आचार्य श्री ओम शंकर जी का आज दिनांक 17/01/2022

  का  सदाचार संप्रेषण 




https://sadachar.yugbharti.in/


https://youtu.be/YzZRHAHbK1w


https://t.me/prav353


कल उन्नाव स्थित विद्यालय के पूर्व छात्र सम्मेलन में कानपुर से भैया दीपक शर्मा जी,  भैया अभिनय मिश्र, भैया गणेश जी ओमर, भैया महेंद्र सिंह सेंगर (सभी सिंगापुर ), भैया वीरेन्द्र त्रिपाठी, भैया मोहन कृष्ण और लखनऊ से भैया अरविन्द तिवारी जी पहुंचे

कार्यक्रम अच्छा रहा इसी तरह राष्ट्रोन्मुखी सिद्धान्त,आचरण , कर्म,व्यवहार का विस्तार होना चाहिये l देशभक्ति सांसारिक कर्मों का एक उदात्त कर्म है त्यागमय जीवन  अपने विचार और व्यवहार का उदात्त उदाहरण है

दुनिया अपने लिये जीती है हम अपनों के लिये जीते हैं

काम्यानां कर्मणां न्यासं संन्यासं कवयो विदुः।


सर्वकर्मफलत्यागं प्राहुस्त्यागं विचक्षणाः।।18.2।।


कुछ विद्वानों के अनुसार काम्य कर्मों का त्याग संन्यास है जब कि कुछ के अनुसार सभी कर्मों के फलों के त्याग को त्याग कहते हैं

हम में से अधिकांश परिवार के मुखिया हैं हम इस भूमिका में शोभायमान रहें इस ओर ध्यान रखें

परस्पर का भाव राष्ट्र की निधि है


क्योंकि भारत माता संपूर्ण विश्व का सदैव कल्याण करना चाहती रही है इसलिये हमारे अन्दर उसकी सेवा करने का भाव होना चाहिये

यहां तो भगवान अवतार लेते हैं


राम और कृष्ण की छवियों का वर्णन करते समय कवियों का विचारकों का भाव उनसे संयुत हो गया है


अध्यात्म में अवतार उद्धार का सिद्धान्त यही है कि हम अनन्त शक्तियों को लेकर अवतरित होते हैं और फिर विस्मृत हो जाते हैं


हम उन शक्तियों को भूल जाते हैं हम समझ नहीं पाते कि हम कौन हैं

आचार्य जी ने प्रेत भाव से घूमने वालों की चर्चा की

प्रातःकाल का जागरण, ध्यान धारणा भजन पूजन आत्मस्थता के आधार हैं


परिवार से लगाव करें

आचार्य जी ने सहजसमाधि का अर्थ बताया


शिक्षार्थी को शिक्षक का समझाया हुआ समझने में कठिन इसलिये लगता है क्योंकि शिक्षार्थी उस भावभूमि पर नहीं उतरा होता है

23 जनवरी के कार्यक्रम की तैयारी हम लोग करना प्रारम्भ कर दें


हनुमान जी हमारे इष्ट हैं वो हमारा अनिष्ट नहीं कर सकते हैं यह भाव हमेशा रखें

भारत माता की सेवा में रत हों

16.1.22

आचार्य श्री ओम शंकर जी का आज दिनांक 16/01/2022 का सदाचार संप्रेषण

 सर्वभूतहिते रताः


प्रस्तुत है प्रभविष्णु आचार्य श्री ओम शंकर जी का आज दिनांक 16/01/2022

  का  सदाचार संप्रेषण 




https://sadachar.yugbharti.in/


https://youtu.be/YzZRHAHbK1w


https://t.me/prav353


सिविल लाइन्स उन्नाव स्थित सरस्वती विद्या मन्दिर इंटर कालेज में आज पूर्व छात्र सम्मेलन है

यहां वंचित वर्ग के अनेक छात्र हैं युग भारती इस विद्यालय को प्रयोगशाला मानकर अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार कर सकती है


युग भारती का स्वरूप आचार्य जी के संस्कारों की उपज है

केशव बलिराम हेडगेवार जी (01-04-1889  *21-06-1940 )के मन में बार बार यह भाव आता था कि आन्दोलनात्मक पद्धति देश में बहुत दिन तक प्रभावकारी नहीं रहती इसलिये कुछ सृजनात्मक कार्य किया जाये

भारत देश अपनी परम्पराओं प्रथाओं विचारों विश्वासों को केवल इस कारण जीवित रख सका कि इसकी पाठशालाएं  जागरूक सक्रिय और हर तरह की परिस्थितियों को झेलती हुई नये विचारों का उद्भव करती रहीं


संसार जब आत्मोन्नति के उपाय नहीं सोचता तो पराश्रित हो जाता है जबकि ईश्वर ने मनुष्य को स्वाश्रित बनाया है

विद्यालयों में इस भाव विचार के साथ शिक्षा दी गई कि तुम मनुष्य स्वाश्रित तो हो लेकिन मैं (ईश्वर ) तुम्हारा अभिभावक हूं और इसी के बल पर संपूर्ण विश्व का भारत गुरुपद प्राप्त देश हो गया


हेडगेवार जी ने देखा कि अब तो संस्कारविहीन होकर विद्यालय नौकरी देने के उपादान साधन बन गये हैं 

और उन्होंने निश्चय किया कि अब नये विद्यालय चलायेंगे ताकि छात्र यशस्वी के साथ तपस्वी भी बनें और देश का समाज का कल्याण हो

आचार्य जी ने यह भी बताया कि भारतीय जनसंघ की नींव कैसे पड़ीऔर जिस तरह की हत्या दीनदयाल जी की हुई उस तरह की हत्याएं कौन करते हैं


यदि हमें यशस्विता मिली है तो हमें यह समझना चाहिए कि हम समाज के ऋणी हैं

आचार्य जी ने तपस्या और एकात्म का अर्थ बताया

कुछ समस्याओं का उल्लेख करते हुए आचार्य जी हम लोगों को यह परामर्श दे रहे हैं कि हम इनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ें


आज उन्नाव के कार्यक्रम में आप सादर आमन्त्रित हैं