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16.1.22

आचार्य श्री ओम शंकर जी का आज दिनांक 16/01/2022 का सदाचार संप्रेषण

 सर्वभूतहिते रताः


प्रस्तुत है प्रभविष्णु आचार्य श्री ओम शंकर जी का आज दिनांक 16/01/2022

  का  सदाचार संप्रेषण 




https://sadachar.yugbharti.in/


https://youtu.be/YzZRHAHbK1w


https://t.me/prav353


सिविल लाइन्स उन्नाव स्थित सरस्वती विद्या मन्दिर इंटर कालेज में आज पूर्व छात्र सम्मेलन है

यहां वंचित वर्ग के अनेक छात्र हैं युग भारती इस विद्यालय को प्रयोगशाला मानकर अपने कार्यक्षेत्र का विस्तार कर सकती है


युग भारती का स्वरूप आचार्य जी के संस्कारों की उपज है

केशव बलिराम हेडगेवार जी (01-04-1889  *21-06-1940 )के मन में बार बार यह भाव आता था कि आन्दोलनात्मक पद्धति देश में बहुत दिन तक प्रभावकारी नहीं रहती इसलिये कुछ सृजनात्मक कार्य किया जाये

भारत देश अपनी परम्पराओं प्रथाओं विचारों विश्वासों को केवल इस कारण जीवित रख सका कि इसकी पाठशालाएं  जागरूक सक्रिय और हर तरह की परिस्थितियों को झेलती हुई नये विचारों का उद्भव करती रहीं


संसार जब आत्मोन्नति के उपाय नहीं सोचता तो पराश्रित हो जाता है जबकि ईश्वर ने मनुष्य को स्वाश्रित बनाया है

विद्यालयों में इस भाव विचार के साथ शिक्षा दी गई कि तुम मनुष्य स्वाश्रित तो हो लेकिन मैं (ईश्वर ) तुम्हारा अभिभावक हूं और इसी के बल पर संपूर्ण विश्व का भारत गुरुपद प्राप्त देश हो गया


हेडगेवार जी ने देखा कि अब तो संस्कारविहीन होकर विद्यालय नौकरी देने के उपादान साधन बन गये हैं 

और उन्होंने निश्चय किया कि अब नये विद्यालय चलायेंगे ताकि छात्र यशस्वी के साथ तपस्वी भी बनें और देश का समाज का कल्याण हो

आचार्य जी ने यह भी बताया कि भारतीय जनसंघ की नींव कैसे पड़ीऔर जिस तरह की हत्या दीनदयाल जी की हुई उस तरह की हत्याएं कौन करते हैं


यदि हमें यशस्विता मिली है तो हमें यह समझना चाहिए कि हम समाज के ऋणी हैं

आचार्य जी ने तपस्या और एकात्म का अर्थ बताया

कुछ समस्याओं का उल्लेख करते हुए आचार्य जी हम लोगों को यह परामर्श दे रहे हैं कि हम इनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ें


आज उन्नाव के कार्यक्रम में आप सादर आमन्त्रित हैं

8.12.21

दिनांक 08/12/2021 का सदाचार संप्रेषण

 संकल्पित जीवन सदा, मानव का शृंगार ।

मानव-जीवन ईश का, है अनुपम उपहार ।।


प्रस्तुत है श्वोवसीय आचार्य श्री ओम शंकर जी का आज दिनांक 08/12/2021 का सदाचार संप्रेषण

यदि नियमित रूप से किये जाने वाले अच्छे कार्य से बहुत लोगों को लाभ पहुंच रहा हो तो प्रयासपूर्वक उसका क्रमभंग नहीं होने देना चाहिए इसी तरह का अच्छा कार्य यह सदाचार संप्रेषण भी है जिसके लिए आचार्य जी नित्य परमात्मा से प्रार्थना करते हैं कि यह क्रम प्रतिदिन बना रहे

बहुत पहले जिस समय मन्दिरों की तोड़ फोड़ शुरू हुई राजा मात्र शौर्य के प्रदर्शन में संलग्न रहते थे आम जनमानस दुविधाग्रस्त था कि हमारा काम पूजापाठ तो सिर्फ पूजापाठ और लड़ाई झगड़े का काम सेना का उस समय से ही राक्षसी शक्तियां यही चाहती रही हैं कि वो जो चाहेंगी वही होगा आज भी राक्षसी शक्तियां यही चाह रही हैं

आचार्य जी ने बताया कि इस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बारे में कुछ ज्यादा ही उथल पुथल की चर्चाएं हो रही हैं लेकिन ऐसी चर्चाओं से अपने विचार डांवाडोल न हो यह देखना चाहिए

1 अप्रैल 1889 को जन्मे हेडगेवार जी ने मात्र 51 वर्ष का जीवन पाया लेकिन गरीबी से उठकर उसमें बहुत सारे काम किये

आचार्य जी ने 

मार्च 1940 में संघ शिक्षा वर्ग (OTC =Officer Training Camp )शिविर की चर्चा की जब हेडगेवार जी अपना इलाज करा रहे थे l प्रतिज्ञित गणवेशधारी तरुण का वर्णन करते हुए आचार्य जी ने कहा कि 

गणवेश संगठन का आधार है संगठन ऐसा हो कि दुष्ट उसे देखकर भयभीत हो जाए l

अपने कर्तव्य के प्रति सजग  व्यक्ति चरित्रवान् व्यक्ति राष्ट्र के प्रति समर्पित व्यक्ति राष्ट्र की सच्ची संपत्ति है l

युगभारती भी बड़े सिंधु का एक छोटा बिन्दु है l अपने कार्यक्रम करते समय हमें अपना मूल उद्देश्य नहीं भूलना चाहिए संगठन त्यागसम्पन्न हो समर्पणसम्पन्न हो शक्तिसम्पन्न हो यह देखें