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9.1.22

श्री ओम शंकर जी का आज दिनांक 09/01/2022 का सदाचार संप्रेषण

 प्रस्तुत है स्मितदृश् आचार्य श्री ओम शंकर जी का आज दिनांक 09/01/2022

  का सदाचार संप्रेषण 




https://sadachar.yugbharti.in/


https://youtu.be/YzZRHAHbK1w


https://t.me/prav353

आचार्य जी आज कानपुर पहुंचेंगे


भाषा का व्यवहार मनुष्य को ही प्राप्त है मनुष्य मनुष्यत्व आदि की चर्चा होती रही है नरोत्तम जैसे विशेषण की युति हमारे साथ हो जाये तो अच्छा लगता है दूसरी ओर नराधम विशेषण सुनने में खराब लगता है


मनुष्य अपने पतनशील भाव को लगातार ऊपर उठाने की चेष्टा करता है


आचार्य जी ने इसके बाद भीष्म पर्व की चर्चा की

भीष्म पर्व के अन्तर्गत ४ उपपर्व हैं और इसमें कुल १२२ अध्याय हैं।

इसी में बताया गया है 

पृथ्वी को सात द्वीपों (जम्बूद्वीप, प्लक्षद्वीप, शाल्मलद्वीप, कुशद्वीप, क्रौंचद्वीप, शाकद्वीप तथा पुष्करद्वीप) में बाँटा गया है, जिनके अलग अलग वर्ष, वर्ण, उपद्वीप, समुद्र तथा पूज्यदेव आदि होते हैं। पृथ्वी के केन्द्र में स्थित द्वीप को जम्बूद्वीप कहते हैं।

122 अध्यायों में 25 वां अध्याय गीता का है

भारतवर्ष की नदियों पर्वतों जलाशयों वनस्पतियों आदि का बहुत विस्तार से वर्णन है इसीलिये महाभारत को पञ्चम वेद कहा जाता है

लेकिन दुर्भाग्यवश यह प्रचलित हो गया कि महाभारत के सारे अध्याय एक साथ बैठकर पढ़ने सुनने नहीं चाहिये अन्यथा विनाश हो जाता है इस तरह की बातों से परिवारों में जब भ्रम और भय आ जाता है तो यह हमें ज्ञान की परम्परा से काट देता है

ये सब शिक्षा के दोष हैं  परतन्त्र में भी हम सदैव संघर्षरत रहे इसलिये हम ज्ञान की इन धरोहरों को बचा पाये

इसी आधार को लेकर दीनदयाल विद्यालय प्रारम्भ हुआ पूजा पाठ करने के लिये प्रोत्साहित किया गया हम मानस गीता का पाठ करें आदि

उस जीवनशैली के आधार पर हम  दीनदयाल विद्यालय के विद्यार्थियों का विकास हुआ

शरीर का मध्यम भाग (कटि से कण्ठ तक ) महत्त्वपूर्ण है उसी तरह किशोर वर्ग की शिक्षा अर्थात् माध्यमिक शिक्षा भी अति महत्त्वपूर्ण है

अब अभिभावक रूप में हमें इस शिक्षा के प्रति बहुत सचेत रहने की आवश्यकता है

दीनदयाल विद्यालय के हम विद्यार्थियों का विकास इस कारण हो पाया कि हमें नरोत्तम माता -पिता नरोत्तम आचार्यगण नरोत्तम बैरिस्टर साहब आदि का सहयोग मिला


इन नरोत्तम व्यक्तियों ने जो कुछ दे सकते थे उसे देकर समाज को पीढ़ी को परिपुष्ट किया

साधु संतों ने भी कई पाठशालाएं खोली


हमारे साहित्य में बहुत कुछ है यद्यपि काफी नष्ट कर दिया गया है जिसे जानने की आवश्यकता है आचार्य जी इसी जिज्ञासा को जगाने के लिये लगातार प्रयासरत हैं


हम अपने बच्चों को ये सब बतायें


ज्ञान में वृद्धि करके हम संसार के मोहमंडल से मुक्ति के भाव को उभार सकते हैं


ब्रह्मज्ञान अविनाशी है ब्रह्म सृष्टि और स्रष्टा दोनों है

परमात्मा के पास बैठने का प्रयास करें यानि उपासना करें


आचार्य जी ने शौर्यप्रमण्डित अध्यात्म की महत्ता पर जोर दिया ज्ञान की ओर हमारी उन्मुखता की कामना की कर्म के प्रति लगाव हो मनुष्यत्व का आनन्द प्राप्त करें

तत्व का संग्रह करें

13.11.21

दिनाङ्क 13/11/2021 का सदाचार संप्रेषण

 प्रस्तुत है पूतात्मन् आचार्य श्री ओम शंकर जी का आज दिनाङ्क 13/11/2021 का सदाचार संप्रेषण

युगभारती लखनऊ की कल एक बैठक लखनऊ में है बैठक किसी योजना को विस्तार देने के लिए एक व्यवस्थित व्यवस्था का प्रारम्भ है

हर कार्यों में हर व्यवस्थाओं में विचार होता है पहले भाव उठता है फिर विचार होता है और उसके बाद क्रिया होती है  

दीनदयाल विद्यालय के निर्माण के पीछे उद्देश्य था कि वहां राष्ट्रोन्मुखी विचारोन्मुखी शिक्षा होगी   और ऐसे विद्यार्थी तैयार होंगे जो अपनी घर गृहस्थी चलाने के साथ साथ समाज को संचेतना प्रदान करेंगे

गीता में दूसरे अध्याय में 59 वें से 72 वें छन्द तक पढ़ने की आचार्य जी ने सलाह दी


विषया   विनिवर्तन्ते,

                             निराहारस्य देहिनः।

        रसवर्जं रसोऽप्यस्य,

                             परं दृष्ट्वा निवर्तते।।

                               (गीता 2/59)

           इन्द्रियों द्वारा विषयों को न ग्रहण करने वाले पुरुषों के विषय तो निवृत्त हो जाते हैं क्यों कि वे ग्रहण ही नहीं करते; किन्तु उन का राग नहीं निवृत्त होता, आसक्ति लगी रहती है। सम्पूर्ण इन्द्रियों को विषयों से समेटने वाले निष्काम कर्मी का राग भी 'परं दृष्ट्वा'- परमतत्त्व परमात्मा का साक्षात्कार करके निवृत्त हो जाता है।

हम इस प्रकार की शिक्षा को प्रेरित करते हैं कि हमें एक अच्छी नौकरी मिल जाए

लेकिन हमारे अन्दर यह जिज्ञासा नहीं है कि हमारा दिमाग जो सबसे विशाल कम्प्यूटर है वो किसने बनाया

तैत्तिरीय उपनिषद् की शिक्षा वास्तविक शिक्षा है जिसे हम लोगों ने समझने का प्रयास नहीं किया

आचार्य जी ने यह भी बताया जो कल की बैठक में वो बताने वाले हैं