2.11.23

आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का आज कार्तिक मास कृष्ण पक्ष पंचमी विक्रम संवत् 2080 तदनुसार 2 नवम्बर 2023 का सदाचार संप्रेषण 826 वां सार -संक्षेप

 मैंने छाती का लहू पिला पाले विदेश के क्षुधित लाल।

मुझ को मानव में भेद नहीं, मेरा अंतस्थल वर विशाल।


प्रस्तुत है विसंवादिन् -रिपु ¹  आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का आज  कार्तिक मास कृष्ण पक्ष पंचमी विक्रम संवत् 2080  तदनुसार 2 नवम्बर 2023 का  सदाचार संप्रेषण 

  826 वां सार -संक्षेप


 1  विसंवादिन् =धूर्त



सदाचारमय विचार कभी भी कमजोर विचार नहीं होते वे ऊर्जा से भरे होते हैं और उनमें कल्याणकारी भावना निहित होती है हमें ऐसे विचारों को ग्रहण करने का यह प्रतिदिन अद्भुत समय उपलब्ध हुआ है हमें इसका लाभ लेना चाहिए और अपने उत्साह को उत्तरोत्तर उन्नति की ओर ले जाना चाहिए

सांसारिक प्रपंचों में ये विचार बहुत काम आते हैं और हमें समस्याओं से मुक्ति दिलाने में सहायक होते हैं

ये विचार विकृतियों को शमित करने के लिए आवश्यक हैं आइये सुप्त रामत्व (रामत्व जब सो जाता है तो व्यक्ति मात्र शरीर रहता है उसे मनुष्यत्व की अनुभूति नहीं होती )को जाग्रत करने के लिए प्रवेश कर जाएं आज की वेला में


भगवान राम कंटकों को साफ करने के लिए अवतरित हुए थे इसके लिए उन्होंने संगठन किया लोगों के सोए रामत्व को जाग्रत किया

शौर्य प्रमंडित अध्यात्म का यह अद्भुत उदाहरण है

शौर्य प्रमंडित अध्यात्म के व्यापक अर्थ में जाएं तो केवल शौर्य का प्रदर्शन ही इसका अर्थ नहीं है

अपितु समय पर कौन सी बात कहनी कष्ट सहकर भी सत्य को न त्यागना आदि भी है


जब जब इस देश के ऊपर आपदाएं आईं हैं तब तब रामत्व जाग्रत हुआ है

आपातकाल कौन भूल सकता है


25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक  की अवधि में भारत में आपातकाल घोषित हुआ था। तत्कालीन राष्ट्रपति मा फ़ख़रुद्दीन अली अहमद ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधान की अनुच्छेद 352 के अधीन आपातकाल की घोषणा कर दी थी


आचार्य जी ने उस समय के प्रसंग बताए आचार्य जी ने जनता समाचार का संपादन किया था

तुलसीदास जी के समय में भी विषम परिस्थितियां थीं जब तुलसीदास ने रामत्व जाग्रत करने का अद्भुत कार्य किया


मंगल करनि कलिमल हरनि तुलसी कथा रघुनाथ की।

गति कूर कबिता सरित की ज्यों सरित पावन पाथ की॥

प्रभु सुजस संगति भनिति भलि होइहि सुजन मन भावनी

भव अंग भूति मसान की सुमिरत सुहावनि पावनी॥

राम की कथा में केवल कथा नहीं है तुलसीदास ने अध्यात्म का सही अर्थ बता दिया

अध्यात्म का अर्थ है हम जहां रह रहे हैं जिन परिस्थितियों में रह रहे हैं अपने पुरुषत्व को जाग्रत करते हुए अपने तेजस से सबको,पर्यावरण को प्रकाशमय बनाएं


आचार्य जी ने इसे भी स्पष्ट किया कि परम्परा का विस्मरण रामत्व का विलोपन कैसे है

हमें अपनी परम्परा को नहीं भूलना है



जग के ठुकराए लोगों को, लो मेरे घर का खुला द्वार।

अपना सब कुछ लुटा चुका, फिर भी अक्षय है धनागार।

इसके अतिरिक्त भैया अरविन्द जी की चर्चा क्यों हुई एक सज्जन विष्णु जी क्या करते थे आदि जानने के लिए सुनें