3.11.23

आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का आज कार्तिक मास कृष्ण पक्ष षष्ठी विक्रम संवत् 2080 तदनुसार 3 नवम्बर 2023 का सदाचार संप्रेषण 827 वां सार -संक्षेप

 प्रस्तुत है विहस्त ¹  आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का आज  कार्तिक मास कृष्ण पक्ष षष्ठी विक्रम संवत् 2080  तदनुसार 3 नवम्बर 2023 का  सदाचार संप्रेषण 

  827 वां सार -संक्षेप


 1  विद्वान्



सदाचारमय विचार कभी भी शिथिल नहीं होते वे ऊर्जा से भरे होते हैं और उनमें कल्याणकारी भावना निहित होती है हमें ऐसे विचारों को ग्रहण करने का यह  अद्भुत समय उपलब्ध  है हमें इसका लाभ लेना चाहिए और अपने उत्साह को उत्तरोत्तर उन्नति की ओर ले जाना चाहिए

हमें समस्याओं से मुक्ति दिलाने में ये विचार बहुत सहायक होते हैं

आइये विकृतियों को शमित करने के लिए प्रवेश कर जाएं आज की वेला में


जाहु बेगि संकट अति भ्राता। लछिमन बिहसि कहा सुनु माता॥

भृकुटि बिलास सृष्टि लय होई। सपनेहुँ संकट परइ कि सोई॥2॥


मां सीता कहती हैं लक्ष्मण तुम शीघ्र जाओ, तुम्हारे भाई बड़े संकट में हैं। लक्ष्मण जी  हँसकर कहते हैं - हे माता! सुनो, जिनके भ्रृकुटि विलास (भौं के इशारे) मात्र से सारी सृष्टि का प्रलय हो जाता है, वे श्री रामजी क्या कभी सपने में भी संकट में पड़ सकते हैं?



प्रकृति विलास और प्रकृति लय के अनुसार परमात्मा के तीन भाव हैं अध्यात्म,अधिदैव और अधिभूत


अध्यात्म भाव में परमात्मा मायातीत और मन वाणी से अगोचर निर्गुण और निष्क्रिय है और यहां इसका नाम है परब्रह्म


अधिदैव भाव में परमात्मा माया का अधिष्ठाता है सृष्टि का कर्ता है उसकी स्थिति और प्रलय का संचालक है यहां इसका नाम ईश्वर है ईश्वर अर्थात् जिसमें ऐश्वर्य है

कार्य और व्यवहार का भावमय स्वरूप है

अधिभूत भाव में अनन्त कोटि ब्रह्माण्ड विराट् का स्वरूप आता है यह कर्ममय स्वरूप है


इन तीनों भावों के अनुसार संसार भी त्रिगुणात्मक है संसार में सब कुछ है

कार्य और कारण का विस्तार संसार का रहस्यात्मक पक्ष है इस रहस्य को प्रयास करके समझा जा सकता है


कार्य को ब्रह्म की प्रकृति कहते हैं पुरुष की लीला का पर्यवसान गुण और भावों की लीला के रूप में होता है



प्रकृति पुरुष को आधार मानने वाले मुक्तिकामी साधक को प्रत्येक वस्तु में त्रिगुण और त्रिभाव देखना होता है


ज्ञान की राशि तभी पूर्ण है जब उसमें तीनों भाव अध्यात्म अधिदैव अधिभूत हों


वेदों में इन तीनों का सन्निवेश है


वेदों को समझने से पहले वेदांगों को समझना आवश्यक है


आचार्य जी ने यह भी स्पष्ट किया कि वेदाध्ययन का अधिकारी कौन है


विवेकानन्द जी का कश्मीर यात्रा वाला क्या प्रसंग है

आचार्य जी की तुलसीदास जी पर रचित कविता कौन सी है जानने के लिए सुनें