अंशो नाना व्यपदेशात्
ईस्वर अंस जीव अबिनासी। चेतन अमल सहज सुख रासी।
प्रस्तुत है विमन्यु ¹ आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का आज फाल्गुन कृष्ण पक्ष अमावस्या विक्रमी संवत् २०८० तदनुसार 10 मार्च 2024 का सदाचार संप्रेषण
*९५५ वां* सार -संक्षेप
1 क्रोध से मुक्त
गुरुपद पर आसीन अत्यधिक क्षमतासम्पन्न ज्ञानी विद्वान् तपस्वी विविध क्षेत्रों में पारगामी आचार्य जी नित्य हम शुद्ध जिज्ञासु औरस /मानस पुत्रों को प्रेरित करते हैं यह हनुमान जी महाराज की बहुत बड़ी कृपा है आचार्य जी इस बात पर भी जोर देते हैं कि राष्ट्र और समाज से अनुरक्ति करने वाले हम शस्त्रों और अस्त्रों का प्रशिक्षण लें और उनका संरक्षण भी करें
आइये प्रवेश करें आज की वेला में
श्रीमद्भगवद्गीता, ब्रह्मसूत्र और उपनिषदों को सामूहिक रूप से प्रस्थानत्रयी कहा जाता है जिनमें दो मार्गों प्रवृत्ति एवं निवृत्ति का तात्त्विक विवेचन है। ये वेदान्त के तीन मुख्य स्तम्भ कहे गए हैं। इनमें उपनिषद श्रुति प्रस्थान, भगवद्गीता स्मृति प्रस्थान और ब्रह्मसूत्र न्याय प्रस्थान है
प्रस्थान का अर्थ है उस दिशा में जाना चाहे ज्ञान के स्थान पर जाना चाहे भक्ति के स्थान पर जाना
कठोपनिषद् में श्रेय और प्रेय दो मार्ग बताये गए हैं
प्रेय मार्ग भौतिकता, भोग का मार्ग है, जो हमें इन्द्रियों की ओर ले जाता है और जीवन की क्षणभंगुरता में मिथ्या आनन्द की अनुभूति कराता है मिथ्या चीजें प्रिय लगती हैं । श्रेय मार्ग आध्यात्मिकता, जीवन के सत्य की ओर ले जाने वाला मार्ग है, जो कि इन्द्रियातीत और आत्मा की ओर ले जाता है, जीवन में परम आनन्द का अनुभव कराता ही है सत्य और तत्त्व की अनुभूति कराने वाला श्रेय मार्ग हमारे ऋषियों का हमें मिला अद्भुत वरदान है किन्तु दुःखद है हमें इसके अध्ययन से वंचित रखा गया
प्रस्थान हो रहा है पथ का पता नहीं है
हम लोग भी इस संसार में प्रस्थान कर रहे हैं
वयं राष्ट्रे जागृयाम का भाव लेकर हम शक्तिसम्पन वीर भयमुक्त भ्रममुक्त सैनिक सेवक रक्षक पुरोहित चल रहे हैं राष्ट्र के लिए हम जाग्रत हैं हम संगठन करते हैं शक्ति संरक्षण का प्रयास करते हैं
इस संसार में नित्य सिद्ध शक्ति की आवश्यकता है दैवासुर संग्राम सत्य है यह संसार है हमें इस संसार में भी सफल होना है और संसारेतर भी
श्रेय और प्रेय दोनों का हम समन्वय करेंगे हमें चिन्तन मनन अध्ययन स्वाध्याय ध्यान धारणा निदिध्यासन के साथ व्यवहारिक स्वरूप का भी अन्वेषण करना है भावी पीढ़ी भयभीत भ्रमित न रहे इसका ध्यान रखना है
इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने भैया मनीष जी भैया प्रदीप जी भैया अरविन्द जी का नाम क्यों लिया आचार्य जी को ब्रह्मसूत्र कैसे मिला
सितम्बर में होने वाले अधिवेशन से समाज को हमें क्या संदेश देना है जानने के लिए सुनें