गगन में संध्या समय
किसके सुयश का गान होता?पक्षियों के राग में किस
मधुर का मधु–दान होता?
पवन पंखा झल रहा है
गीत कोयल गा रही है।
कौन है, किसमें निरंतर
जग–विभूति समा रही है
प्रस्तुत है अनवद्य ¹ आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष प्रतिपदा विक्रमी संवत् २०८० तदनुसार 11 मार्च 2024 का सदाचार संप्रेषण
*९५६ वां* सार -संक्षेप
1 निर्दोष
भावनात्मक दृष्टि से श्रद्धा के पात्र गुरुपद पर आसीन आचार्य जी नित्य हम उस दीनदयाल नामक महापुरुष जिसने अपने को आहूत कर इस धरती में अपने विचार बो दिए के नाम से जानने वाले विद्यालय के शिष्यों को हमारे हित के लिए उपदेश देते हैं हमारे अन्दर शक्ति बुद्धि विचार कौशल संयम स्वाध्याय उत्पन्न कराते हैं ताकि हम संसार की समस्याओं को हल करने के लिए उत्फुल्ल होकर आगे बढ़ सकें यह हनुमान जी की महती कृपा है कि ये सदाचार संप्रेषण हमारी सांसारिक और आध्यात्मिक दोनों प्रकार की शक्तियों के सामञ्जस्य हेतु एक उपाय हैं
भारतीय संस्कृति गुरु शिष्य परम्परा की संस्कृति है
को वा गुरुर्यो हि हितोपदेष्टा । शिष्यस्तु को यो गुरुभक्त एव ॥
हम गुरु शिष्य साथ साथ ब्रह्मवर्चस्, अर्थात् वह शक्ति जो व्यक्ति तप और स्वाध्याय द्वारा प्राप्त करे,को प्राप्त करने की चेष्टा करते हैं
इस परम्परा को भौतिकता में लीन परिवारों में प्रसरित करने की भी आवश्यकता है
भौतिक विकास अर्थात् दुनियादारी के साथ साथ आध्यात्मिक विकास भी आवश्यक है क्योंकि हमारा लगाव प्रायः अध्यात्म की ओर उन्मुख नहीं रहता है इसलिए भौतिक विकास की ओर हमारा आकर्षण बढ़ता है भौतिकता जब विस्मृत होने लगती है तब अध्यात्म का द्वार खुलता है अध्यात्म एक अद्भुत शक्ति है शक्तिहीनता से शवत्व हो जाता है शक्तिमय होना शिवत्व है
शिव के कार्य अद्भुत हैं हमारे देश में शिव का अद्भुत विस्तार है असंख्य शिव मन्दिर हैं
हमारी आर्ष मान्यता है कि जब अव्यक्त अवस्था
(परमात्मा की निर्विकल्प समाधि ) से जगत् व्यक्त होता है तो उस मूल स्थिति में विक्षोभ उत्पन्न होता है
जहां जहां विक्षोभ उत्पन्न होगा वहां कंपन अवश्य होगा कंपन ध्वनि का मूल है पश्चिमी जगत् के दार्शनिक भी सृष्टि को कंपन से उद्भूत मानते हैं हमारे शास्त्र ग्रंथों के अनुसार नाद ब्रह्म को ही सृष्टि का उद्गम माना गया है उसे एक शब्द अर्थात् ॐ में व्यक्त कर दिया गया
यह सृष्टि की संरचना के प्रति हमारा विश्वास है
इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने भैया अरविन्द जी का बेलपत्र वाला कौन सा प्रसंग बताया कवि सुकंठ जी की चर्चा क्यों हुई भारत रत्न से भी श्रेष्ठ रत्न किसे मिला जानने के लिए सुनें