17.3.24

आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का फाल्गुन शुक्ल पक्ष सप्तमी विक्रमी संवत् २०८० तदनुसार 17 मार्च 2024 का सदाचार संप्रेषण *९६२ वां* सार -संक्षेप

 मैं तत्व शक्ति विश्वास समस्याओं का निश्चित समाधान

मैं जीवन हूं मानव जीवन मैं सृजन विसर्जन उपादान


प्रस्तुत है अरिष्टताति ¹ आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष सप्तमी विक्रमी संवत् २०८० तदनुसार 17 मार्च 2024 का सदाचार संप्रेषण
  *९६२ वां* सार -संक्षेप
1सौभाग्यशाली या सुखी बनाने वाला

हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें हनुमान जी की कृपा से ये सदाचार संप्रेषण प्राप्त हैं जो हमें मनुष्यत्व की अनुभूति कराते हैं हमें उत्साहित आनन्दित करते हैं समस्याओं के समाधान सुझाते हैं कुंठाग्रस्त होने से बचाते हैं हमारा परिष्करण उन्नयन करते हैं हमें समाजोन्मुखता राष्ट्रोन्मुखता के लिए प्रेरित करते हैं और हम इसलिए भी सौभाग्यशाली हैं कि हमें आनन्दमय परिवेश उपलब्ध कराता भारतवर्ष, जो संसार की सारी समस्याओं का समाधान करने में सक्षम रहता है,जिसमें मानवत्व की सर्वाधिक अनुभूति हुई है,में हमारा जन्म हुआ है
जिस दिन नभ में तारे छिटके,
जिस दिन सूरज-चांद बने,
तब से है यह देश हमारा,
यह अभिमान हमारा है।

हमारे देश में पूजा पाठ संसार के रहस्यों को समझने का आधार बनते हैं हमारे ऊपर जितने भी
संकट आएं हम अक्षयवट के समान टिके रहते हैं

सही शिक्षा के माध्यम से यदि हम आत्मविस्तार करने लगें तो इससे मानवता का कल्याण होगा
कुलस्यार्थे त्यजेदेकं ग्रामस्यार्थे कुलंत्यजेत्। ग्रामं जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिवीं त्यजेत्॥


उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।

आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः।।6.5।।

 शिक्षा ज्ञान, विचार, व्यवहार है संसार के बहुरंगी स्वभाव को जानना भी शिक्षा का मूल है लेकिन नौकरी के हित साधने वाली शिक्षा नहीं शिक्षा का मूल है कि हमारे जीवन की भयानकता समाप्त हो हर परिस्थिति में आनन्दोत्सव मनाएं कुल मिलाकर सही शिक्षा ही जीवन है और जीवन का अर्थ है जिओ और जीने दो लेकिन स्वयं भी संस्कारवान् बनो और पूरे संसार को संस्कारित करो
कृण्वन्तो विश्वम् आर्यम्
संपूर्ण विश्व को आर्य बनाने का हमारा स्वप्न है
अंधकार मिटाना हमारा काम है
रामराज्य हमारा स्वप्न है
शिक्षा व्यापार नहीं है

इसके अतिरिक्त आचार्य जी आज उन्नाव क्यों जा रहे हैं भैया अतुल वाजपेयी जी की चर्चा क्यों हुई आगामी अधिवेशन के विषय में आचार्य जी ने क्या बताया जानने के लिए सुनें