16.3.24

आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का फाल्गुन शुक्ल पक्ष षष्ठी विक्रमी संवत् २०८० तदनुसार 16 मार्च 2024 का सदाचार संप्रेषण *९६१ वां* सार -संक्षेप

 प्रस्तुत है चित्तापहारिन् ¹ आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष षष्ठी विक्रमी संवत् २०८० तदनुसार 16 मार्च 2024 का सदाचार संप्रेषण

  *९६१ वां* सार -संक्षेप
1 मनोहर

विनती सुन लो हे भगवान, हम सब बालक हैं नादान।
विद्या- बुद्धि नहीं है पास, हमें बना लो अपना दास।
पैदा तुमने किया सभी को, रुपया पैसा दिया सभी को।
हाथ जोड़कर खड़े हुए हैं, पैरों पर हम पड़े हुए हैं।
बुरे काम से हमें बचाना, खूब पढ़ाना खूब लिखाना।
बड़ा बड़ा पद पावैंगे हम, मिहनत कर दिखलावैंगे हम।
कितना भी बढ़ जावैंगे हम, तुमे नहीं बिसरावैंगे हम।
हमें सहारा देते रहना, खबर हमारी लेते रहना।
लो फिर सीस नवाते हैं हम, विद्या पढ़ने जाते हैं हम।


एक शिक्षक के रूप में आचार्य जी नित्य हम शिक्षार्थियों को सदाचारमय विचारों द्वारा स्वधर्मानुसरण,
स्वधर्मरक्षा,समाजोन्मुखता, राष्ट्रोन्मुखता, शिक्षकधर्म -निर्वहन के लिए प्रेरित,प्रभावित,उत्साहित, संतुष्ट करते हैं यह हनुमान जी की महती कृपा है
आचार्य जी का प्रयास रहता है कि हमारे भीतर तप संयम सदाचार प्रवेश करे हम पश्चिम की पैरोकारी से बचें अपनी भाषा अपनी भूषा से प्रेम करें खानपान सही रखें छल प्रपंच से बचें सद्विचारों को ग्रहण कर उन्हें व्यवहार में उतारने के लिए तड़पें
शिक्षक और शिक्षार्थी का तात्त्विक स्वरूप संपूर्ण संसार को संस्कारित करने वाले हमारे देश भारत का आनन्दमय स्वरूप है
हमारे देश में परिवर्तन हो रहा है लेकिन उस परिवर्तन को हमें स्थायित्व प्रदान करना है

निम्नांकित पंक्तियों में आचार्य जी की उभरती भावनाएं देखिए
१७ जनवरी २०१३ को लिखी कविता

जूझ रहा है जटिल समस्याओं से अपना देश रे
उठो जवानों तुम्हें बुलाता फिर केसरिया वेश रे
शुभ्र हिमालय तापतप्त है गंगा यमुना मलिनमुखी
अट्टहास करती दानवता धूर्त कर्म संतुष्ट सुखी...

एक और कविता देखिए

सच के संयम के साथ जब कभी धोखा होता है
तब धरती पर संग्राम अजीब अनोखा होता है..

इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने मौलवी जी की चर्चा क्यों की बगीचे में बंगला रखने से क्या तात्पर्य था पाटी पूजन में क्या लिखवाया जाता था कवि अतुल वाजपेयी जी की चर्चा क्यों हुई जानने के लिए सुनें