13.12.25

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज पौष कृष्ण पक्ष नवमी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 13 दिसंबर 2025 का सदाचार संप्रेषण *१५९८ वां* सार -संक्षेप

 प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज पौष कृष्ण पक्ष नवमी विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 13 दिसंबर 2025 का सदाचार संप्रेषण

  *१५९८ वां* सार -संक्षेप


मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ८०

अपने भीतर के गुरुत्व को जगाएं


पुरुषार्थ की पहचान बने नित्य उद्बोधन रूपी सुकरातीत कार्य में रत आचार्य जी हमें प्रेरित करते हैं यह हमारा सौभाग्य है इस आधार पर भी हम कह सकते हैं कि कलियुग में भी सतयुग निवास कर रहा है हमें इसका लाभ उठाना चाहिए


 विषम से विषम परिस्थितियों में भी यदि हमारा भाव सुस्पष्ट रहे कि मेरा वास्तविक स्वरूप ईश्वर से अलग नहीं, मैं उसी का अंश या प्रतिबिंब हूं(सोऽहम् ) तो शरीर, मन,बुद्धि, विचार,निराश हताश करने वाली परिस्थितियां, झंझट शमित हो जाते हैं हमें प्रकाश प्राप्त होता है और उसी प्रकाश से हमें आनन्द की अनुभूति होती है हम विभिन्न प्रकार के संकट झेल लेते हैं और तब हम कर्मानुरागी बनने की दिशा में चल सकते हैं

श्री गुर पद नख मनि गन जोती। सुमिरत दिब्य दृष्टि हियँ होती॥

दलन मोह तम सो सप्रकासू। बड़े भाग उर आवइ जासू॥3॥


निम्नांकित कविता में आचार्य जी युगभारती संस्था को एक दिव्य, जाग्रत और रक्षक शक्ति के रूप में चित्रित कर रहे हैं जो वर्तमान सामाजिक, मानसिक और नैतिक अव्यवस्था के समय में आशा की किरण है। आज का समाज विश्वासहीनता, भय और निष्क्रियता से ग्रस्त है।राष्ट्र की भावनाओं में अभावों का बोलबाला है यह संस्था ईश्वरीय योजना का अंग है जो भौतिकता में उलझे शिक्षा-जगत को दिशा दे रही है।


विश्वास आँखें खोल-मूँद रहा विवश, 

भावाग्नि भय से ग्रस्त कोने में खड़ी ।

पौरुष पराक्रम गहन निद्राग्रस्त है, 

कर्मानुरागी वृत्ति शर्तों पर अड़ी ॥

    इस हाल में सद्धर्म वर्म भ्रमित चकित,

    अपनत्व-चौखट की सभी चूलें हिलीं। 

     भारतीभावों में अभावों का चलन, 

      लुच्चों लफंगों सभी की बाछें खिलीं ॥


ऐसे समय युगभारती माँ भारती की टेर है, 

है देर ईश्वर के यहाँ बिल्कुल नहीं अंधेर है।

युगभारती कर्मानुरागी शक्ति का विस्तार है, 

अध्यात्म के शौर्याग्नि मंडित सत्य का संसार है ॥...


युगभारती हनुमान जी महाराज का वरदान है, 

भौतिक भँवर में जूझते शिक्षा-जगत का त्राण है

इसके अतिरिक्त Power House से आचार्य जी का क्या तात्पर्य है जानने के लिए सुनें