15.12.25

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज पौष कृष्ण पक्ष एकादशी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 15 दिसंबर 2025 का सदाचार संप्रेषण *१६०० वां* सार

 निर्बल बकरों से बाघ लड़े

भिड़ गये सिंह मृग छौनों से

घोड़े गिर पड़े, गिरे हाथी

पैदल बिछ गये बिछौनों से...

हय रुण्ड गिरे, गज मुण्ड गिरे

कट कट अवनी पर शुण्ड गिरे

लड़ते लड़ते अरि झुण्ड गिरे

भू पर हय विकल वितुण्ड गिरे


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज पौष कृष्ण पक्ष एकादशी विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 15 दिसंबर 2025 का सदाचार संप्रेषण

  *१६०० वां* सार -संक्षेप


मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ८२

लेखन-योग अपनाएं ताकि  जब निराश हताश हों  तो आशा की किरण दिखे


उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्।


आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः।।6.5।।


मनुष्य का उत्थान  जो मनुष्यत्व की पहचान है या पतन स्वयं उसके अपने हाथ में है। आत्म-संयम, आत्मचिंतन और आत्मबल के द्वारा वह महान् बन सकता है, अन्यथा वह स्वयं को नीचे गिरा सकता है। यही आत्मदर्शन का गूढ़ संदेश है। तो आइये अपने उत्थान के लिए, आत्म -बल आदि प्राप्त करने के लिए  और संसार में रहते हुए विचारों को सुरक्षित संवर्धित  और संप्रेषित करने की विधि जानने के लिए प्रवेश करें आज की वेला में



मनुष्य का संकल्प यदि अडिग हो, तो कोई भी कठिनाई उसे अपने लक्ष्य से विमुख नहीं कर सकती।शारीरिक बाधाएं भी मन की दृढ़ता के सामने पराजित हो जाती हैं।जैसे 

भारत की पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी *अरुणिमा सिन्हा* को २०११ में ट्रेन से फेंक दिया गया था, जिससे उनका एक पैर कट गया। किंतु उन्होंने हार नहीं मानी। कृत्रिम पैर के सहारे उन्होंने २०१३ में माउंट एवरेस्ट फतह कर, ऐसा करने वाली विश्व की पहली दिव्यांग महिला बनने का गौरव प्राप्त किया।

 परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, यदि आत्मबल और उद्देश्य स्पष्ट हो तो असंभव को भी संभव किया जा सकता है हमारा जीवन संघर्ष, आत्मविश्वास और जिजीविषा का अद्भुत उदाहरण बन सकता है


अलमस्त फ़कीर कभी करते परवाह नहीं

काँटों जैसी ही फूलों की भी चाह नहीं

उत्साह उमंगों के आगे नग बौने हैं

सिंहों से आँख मिलाते मृग के छौने हैं

बस इसीलिए दुनिया की दुनियादारी से

जूझता रहा, टूटा भी, मगर निराश नहीं ॥ ५ ॥

यह विश्वास करें कि परमात्मा हमारे भीतर विद्यमान है वह परमात्मा हमारे लिए सब कुछ है 

इसके अतिरिक्त युगभारती की प्राणिक ऊर्जा क्या है भैया संजय गौड़ जी का उल्लेख क्यों हुआ, कलियुग की रक्षा के लिए किसे कार्यभार सौंपा गया जानने के लिए सुनें