21.12.25

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज पौष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा /द्वितीया विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 21 दिसंबर 2025 का सदाचार संप्रेषण *१६०६ वां* सार -संक्षेप

 शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च।


ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम्।।18.42।।


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज पौष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा /द्वितीया विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 21 दिसंबर 2025 का सदाचार संप्रेषण

  *१६०६ वां* सार -संक्षेप


मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ८८

चूंकि कर्म ही धर्म है अतः अपने कर्म को सुचारु रूप से करें उदाहरणार्थ अपने राष्ट्र भारत को परम वैभव पर पहुंचाना हमारा कर्म है (  शिक्षक धर्म का निर्वाह करते हुए आचार्य जी नित्य हमें प्रेरित करने के लिए यह सदाचार संप्रेषण रूपी कर्म कर रहे हैं )


गो-धन, गज-धन, वाजि-धन और रतन-धन खान।

 जब आवत संतोष-धन, सब धन धूरि समान ॥६॥


बाह्य वैभव और भौतिक सुख-सुविधाएं अंततः क्षणिक और अस्थायी हैं। जीवन की सच्ची संपत्ति संतोष है, जो न केवल मन की शांति देता है, बल्कि आत्मिक उन्नति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। अतः संतोष ही ऐसा धन है, जो सभी प्रकार की संपत्तियों से श्रेष्ठ और स्थायी है।इसी प्रकार आशा और विश्वास  भी अत्यन्त गहन और मूलभूत तत्व हैं, ये सब मानव जीवन को दिशा और दृढ़ता प्रदान करते हैं। ये केवल मानसिक अवस्थाएँ नहीं, बल्कि आत्मा के भीतर से उत्पन्न होने वाले ऐसे प्रेरक तत्त्व हैं, जो मनुष्य को निराशा, भय, संशय और कठिन परिस्थितियों से उबारते है l यदि हम इन्हें अपने जीवन का केन्द्र बनाकर उनका ध्यान करें, तो हमारा चित्त शुद्ध और ईश्वर की ओर उन्मुख होता है। जब मन ईश्वर की ओर उन्मुख होता है, तब हम अपने जीवन के उद्देश्य को समझने लगते हैं। यह उद्देश्य कोई साधारण कर्म नहीं, बल्कि वही कार्य है जिसके लिए स्वयं ईश्वर ने हमें इस संसार में भेजा है अर्थात् हमारा धर्म, हमारा कर्तव्य, और हमारा जीवन-मूल्य।


यदि हम आशा और विश्वास के साथ उस कार्य को पूरे मन, शक्ति और निष्ठा से करते हैं, तो हमारा आत्मिक विकास होता है lजहाँ कार्य करना विवशता बन जाता है, वहाँ जीवन भी बोझस्वरूप प्रतीत होने लगता है।


स्वयं हम ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और शूद्र सब कैसे हैं इसे आचार्य जी ने स्पष्ट किया 

इसके अतिरिक्त भैया डा अमित जी भैया डा अजय कटियार जी चर्चा में कैसे आये भैया वीरेन्द्र त्रिपाठी जी कल क्यों चिन्तित हुए  पश्चिम का जीवन खंड खंड कैसे है जानने के लिए सुनें