10.1.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ कृष्ण पक्ष अष्टमी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 10 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण *१६२६ वां* सार -संक्षेप

 प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ कृष्ण पक्ष अष्टमी विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 10 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१६२६ वां* सार -संक्षेप

स्थान : ग्राम सरौहां

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १०८

इन वेलाओं का श्रवण कर हम उत्साहित आनन्दित और संकल्पित होने का प्रयास करें



हम सभी को चाहिए कि अपने ज्ञान, बुद्धि, शक्ति, विचार और कौशल का उपयोग समाज के हित में करें, ताकि हम पूर्वकाल में जो सामाजिक सौहार्द, सहयोग और आनन्द अनुभव करते थे, उसे पुनः प्राप्त कर सकें। यह कोई बढ़ा-चढ़ाकर कही गई बात नहीं है, बल्कि सत्य है कि समाज केवल हमसे अपेक्षा ही नहीं करता, बल्कि समय आने पर हमारी रक्षा भी करता है। अतः समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझना और उन्हें निभाना हमारा उत्तरदायित्व है।

ईश्वर को समर्पित होकर,निःस्वार्थ भाव से कर्म करने वाला व्यक्ति कर्मों से बंधता नहीं है। यही जीवन का आदर्श मार्ग है – सक्रिय रहकर धर्मपूर्वक जीवन जीना।

जिस परमात्मा से सम्पूर्ण प्राणियों की उत्पत्ति होती है और जिससे यह सम्पूर्ण संसार व्याप्त है, उस परमात्मा का अपने कर्म के द्वारा पूजन करके मनुष्य सिद्धि को प्राप्त हो जाता है।


हम कब आशंकित होते हैं,भैया अरुण जी भैया आशुतोष जी भैया नरेन्द्र जी का उल्लेख क्यों हुआ जानने के लिए सुनें