13.1.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ कृष्ण पक्ष दशमी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 13 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण *१६२९ वां* सार -संक्षेप

 प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ कृष्ण पक्ष दशमी विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 13 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१६२९ वां* सार -संक्षेप

स्थान : ग्राम सरौहां

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १११

हम १००० वाट के बल्ब हैं यह अनुभूति कर अपनी शक्तियों को पहचानें हम समाज में व्याप्त अंधकार को दूर करने में अत्यन्त सक्षम हैं


हमारे लिए अपने सांसारिक जीवन को सुव्यवस्थित करने के लिए गंभीर चिन्तन आवश्यक है। यद्यपि वर्तमान जीवनशैली के दृष्टिकोण से यह बात हममें से कुछ लोगों को असामान्य प्रतीत हो सकती है कि हमें प्रातःकाल शीघ्र उठना चाहिए, किन्तु वस्तुतः यह अत्यन्त स्वाभाविक और हितकारी है प्रातःकाल जागरण न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए उपयुक्त है, अपितु यह मानसिक शुद्धता और जीवन में अनुशासन के विकास का भी माध्यम है इसे प्रायः हर मनीषी चिन्तक विचारक कहता है l आचार्य जी भी यही कह रहे हैं हम युगभारती के सदस्यों का कर्तव्य है कि हम इस ओर अवश्य ध्यान दें l

 हमारे भीतर कुछ विशिष्ट तात्त्विक शक्तियाँ सदा विद्यमान रहती हैं जो हमारे आत्मबल के रूप में काम करती हैं। किन्तु हम उन्हें पहचान नहीं पाते क्योंकि हमारा ध्यान बाह्य भोगों और विकर्षणों में अधिक रहता है। इसमें हमारी शिक्षा का भी दोष है l यदि हम अपने जीवन को सत्प्रवृत्तियों और तात्त्विक चिन्तन से जोड़ें, तो वही शक्तियाँ हमारे जीवन को सार्थक दिशा देने में उसे संयमित करने में सहायक बन सकती हैं। विवशता हमें कुंठित करती है अतः हमें विवशता से बचना चाहिए l जीवन में आ रहे अवरोधों को शमित करने के लिए हमारे निर्णयों में स्पष्टता,विचारों में स्थिरता,कर्म में निरंतरता और लक्ष्य में दृढ़ता हो l इसके लिए गहन अध्ययन भी आवश्यक है l अविद्या के साथ विद्या को भी जानना आवश्यक है l

इसके अतिरिक्त शोभन सरकार की चर्चा आचार्य जी ने क्यों की? कामधेनु तन्त्रम् का उल्लेख क्यों हुआ?

युगभारती कार्यकारिणी समिति के लिए आचार्य जी ने क्या सुझाव दिए?हम सामूहिक रूप से आधुनिक काल का समाज को किस प्रकार विचार दे सकते हैं? संविधान क्या है? जानने के लिए सुनें