प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ कृष्ण पक्ष एकादशी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 14 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण
*१६३० वां* सार -संक्षेप
स्थान : ग्राम सरौहां
मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ११२
अपने भीतर छिपी दिव्य शक्तियों को पहचानें
विश्वास मनुष्य के भीतर छिपी हुई वह दिव्य शक्ति है जो उसे कठिन से कठिन परिस्थिति में भी डगमगाने नहीं देती। यह आत्मबल का स्रोत है, जो जीवन में आगे बढ़ने, संघर्ष करने और लक्ष्य प्राप्त करने में सहायता करता है। परंतु यह विश्वास स्वतः स्थिर नहीं होता, इसे नियमित अभ्यास, आत्मचिंतन, सत्संग, अध्ययन और सकारात्मक अनुभवों के माध्यम से सशक्त बनाना पड़ता है। श्री रामचरित मानस का अध्ययन विश्वास को सुस्थिर करने का एक उत्तम उपाय है विषम परिस्थितियों में इसे रचकर गोस्वामी तुलसीदास जी ने हम सनातनधर्मियों में विश्वास का संचार किया हमें शक्ति की अनुभूति कराई हमें संगठित होना सिखाया प्रेम का अखंड व्रती बनाया अन्यथा भय भ्रम लालच लोभ से हम लोगों का विश्वास डगमगा रहा था और हम धर्म परिवर्तन के लिए विवश हो रहे थे
रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। देखि बिभीषन भयउ अधीरा॥
अधिक प्रीति मन भा संदेहा। बंदि चरन कह सहित सनेहा॥1॥
नाथ न रथ नहि तन पद त्राना। केहि बिधि जितब बीर बलवाना॥
रावण को रथ पर और भगवान् राम को बिना रथ के देखकर भगवान् राम के भक्त विभीषण सशंकित हो गए क्योंकि विचारों के प्रति वे समर्पित नहीं थे उनमें विकार भरे हुए थे
भगवान् राम उनके भ्रम का निवारण करते हुए कहते हैं
सुनहु सखा कह कृपानिधाना। जेहिं जय होइ सो स्यंदन आना॥2॥
वीरता और धैर्य उस रथ के पहिए हैं, सत्य और शील (सदाचार) उसकी ध्वजा और पताका हैं। शक्ति, विवेक, इंद्रियनिग्रह और परोपकार उसके चार घोड़े हैं, जो आत्मनियंत्रण और जनकल्याण के प्रतीक हैं। क्षमा, कृपा और समता वे रस्सियाँ हैं, जिनसे घोड़े जुड़े हैं।
ईश्वर का भजन ही (उस रथ को चलाने वाला) चतुर सारथी है। वैराग्य ढाल है और संतोष तलवार है। दान फरसा है, बुद्धि प्रचण्ड शक्ति है, श्रेष्ठ विज्ञान कठिन धनुष है l
( यह रथ एक आदर्श जीवन जीने की दिशा दिखाता है—जिस पर आरूढ़ होकर मनुष्य जीवन की कठिनाइयों को पार कर सकता है और धर्म का पालन करते हुए सफलता प्राप्त कर सकता है।)
आज भी विषम परिस्थितियां हैं हमें इस ओर चिन्तन करना चाहिए और अपनी क्षमताओं की अनुभूति कर कर्मरत होना चाहिए
जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे आचार्य जी श्री ओम शंकर त्रिपाठी जी के अग्रज भाईसाहब श्री राम शंकर त्रिपाठी जी ३ जनवरी को ब्रह्मलीन हो गए थे आज उनका त्रयोदशा कार्यक्रम है l
इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने ट्रम्प का उल्लेख क्यों किया भारतभ्रमण क्यों आवश्यक है जानने के लिए सुनें