15.1.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ कृष्ण पक्ष द्वादशी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 15 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण *१६३१ वां* सार -संक्षेप

 प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ कृष्ण पक्ष द्वादशी विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 15 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१६३१ वां* सार -संक्षेप

स्थान : ग्राम सरौहां

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ११३

*मैं चिर युवा हूं* इसकी सदैव अनुभूति करें क्योंकि कर्म (सत्कर्म) के लिए यह अत्यन्त आवश्यक भाव है



राष्ट्रमन्दिर का पुजारी मुक्ति का कामी नहीं हूं...

आचार्य जी सेवा और समर्पण में रत एक ऐसे पुरोहित हैं जो किसी भी स्वार्थ या भेदभाव के बिना राष्ट्र की सेवा समाज की सेवा को ही अपने जीवन का उद्देश्य मानते हैं। जिस प्रकार एक पुजारी मन्दिर में निष्ठा, श्रद्धा और पवित्र भाव से पूजा करता है, उसी प्रकार आचार्य जी राष्ट्र की भलाई, उन्नति और अखण्डता के लिए अपने विचार और कर्म समर्पित करते हैं l 


आचार्य जी कहते हैं वे मुक्ति के कामी नहीं हैं क्योंकि जो मुक्ति प्राप्त कर लेता है उसे इस सृष्टि से कोई प्रयोजन नहीं रहता वह सृष्टि के संचरण से मुक्त रहता है

और आचार्य जी को तो सृष्टि से प्रयोजन है l हमें भी सृष्टि से मतलब रखना चाहिए हमें अपने सनातनधर्मी बन्धुओं के भय और भ्रम का निवारण करना चाहिए और उन्हें आश्वस्त करना चाहिए कि क्रूरता करने वाले दुष्टों को कुचलने के लिए हमारे समीप पर्याप्त शक्ति है अपने लक्ष्य की प्राप्ति में मार्ग में आ रही चमचमाहट से हमें विचलित नहीं होना चाहिए आत्मबल, विश्वास, संकल्प या ईश्वरीय कृपा जो भी जीवन-मार्ग में आवश्यक  ऊर्जा है वह हमारे भीतर विद्यमान है इसको हमेशा अनुभव करते रहें l

इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने बताया कि संसार के जंजालों से दूर आत्मानन्द में विचरण करने के लिए लेखन,जो एक अत्यन्त प्रभावशाली साधन है, अवश्य करें क्योंकि लेखन न केवल विचारों को स्पष्ट करता है, बल्कि वह अन्तर्मन के द्वार खोलकर आत्मा के स्पर्श का अवसर देता है। जब हम अपने विचारों, अनुभूतियों और भावनाओं को शब्दों में रूपान्तरित करते हैं, तब भीतर का बोझ हल्का होता है और मन शान्ति की ओर अग्रसर होता है। यही शान्ति, आत्मानन्द का द्वार है।

कल त्रयोदशा कार्यक्रम सम्पन्न हुआ जिसमें १९७५ बैच से भैया शशि शर्मा जी भैया राजेश मल्होत्रा जी भैया विनय अजमानी जी १९७६ से भैया सुनील जैन जी भैया बलराज पासी जी १९७८ से भैया अरविन्द तिवारी जी १९८२ से भैया वीरेन्द्र त्रिपाठी जी भैया मलय चतुर्वेदी जी १९८३ से भैया अतुल मिश्र और प्रवीण अग्रवाल १९८४ से भैया आलोक जी, भैया प्रदीप त्रिपाठी जी भैया मनोज अवस्थी जी १९८५ से भैया समीर राय जी भैया अरुण जी भैया पुनीत श्रीवास्तव जी १९८६ से भैया मोहन कृष्ण जी १९८८ से भैया विनीत मेहरोत्रा जी, भैया तरुण सक्सेना जी, भैया आलोक सांवल जी,  भैया जय सिंह जी, भैया नरेंद्र सिंह जी,  भैया मनीष कृष्णा जी

१९८९ से भैया अमित गुप्त जी बैच १९९२ से भैया रत्नेश तिवारी जी

१९९६ से भैया पवन जी, भैया रामेंद्र जी २००१ से भैया संदीप जी उपस्थित रहे

भैया डा नरेन्द्र जी,भैया विभास जी, भैया दुर्गेश जी, श्री मुकेश जी श्री हरमेश जी आदि भी उपस्थित थे