23.1.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ शुक्ल पक्ष पञ्चमी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 23 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण *१६३९ वां* सार -संक्षेप

 बसंत पंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ शुक्ल पक्ष पञ्चमी विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 23 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१६३९ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १२१


मन्दिर भाव, विचार और क्रियाओं के जाग्रत स्वरूप बनें 

 वहां  राष्ट्रभक्तों के एकत्रीकरण भजन गान प्रवचन होने चाहिए l



हमारे भारत देश की भूमि पर वेदों का उद्भव हुआ, जहाँ अनुभूति को ही ज्ञान का मूल माना गया। यहाँ ऋषियों ने केवल सुना-समझा नहीं, अपितु आत्मसाक्षात्कार के माध्यम से सत्य का अनुभव किया और उसे अभिव्यक्ति का स्वरूप प्रदान किया। अद्भुत है यह ऋषित्व l ऋषित्व का अर्थ मात्र तपस्या नहीं था, बल्कि तत्त्व के सूक्ष्म बोध, शक्ति की साधना और विचार की परम शुद्धता का समन्वय था। इसी कारण यज्ञमयी भारतीय परम्परा में ज्ञान सैद्धान्तिक न होकर जीवन से संयुत हुआ और व्यवहार में उतरा l

किन्तु विडम्बना यह है कि इस विराट् वैचारिक और आध्यात्मिक विरासत के होते हुए भी हम उसके वास्तविक स्वरूप को पहचान नहीं पाए। वेद, उपनिषद्, दर्शन और साधना-पद्धतियाँ हमारे पास होते हुए भी हम उन्हें केवल ग्रन्थों तक सीमित मान बैठे, जबकि वे जीवन को दिशा देने वाले जीवंत सूत्र हैं। हमारे दृष्टिकोण को संकुचित करने के अनेक कारण रहे हैं किन्तु अब उनसे हम विचलित न हों l

यदि हम अपनी परम्परा को केवल अतीत की धरोहर न मानकर वर्तमान जीवन में उतारें, तब हमें यह अनुभव होगा कि हमारे देश में जो कुछ हुआ है, वह केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज भी मानवता के लिए अत्यन्त लाभकारी है l अतः हम अपने अद्भुत साहित्य का मन लगाकर अध्ययन करें ग्रंथों को क्लिष्ट न मानें परिश्रम करते हुए उन्हें आत्मसात् करें स्वाध्याय करें फिर यही हम वर्तमान  पीढ़ी को भी समझाएं l उसे दुर्दशा से बचाएं l भ्रम से दूर करें l


इसके अतिरिक्त राष्ट्रयज्ञ के विलक्षण होता आचार्य जी ने औरास में चल रहे यज्ञ की चर्चा की जिसमें  एक सज्जन अंकित मूल्य से आधे मूल्य पर पुस्तकें बेच रहे थे जहां से आचार्य जी ने सामवेद संहिता नामक पुस्तक क्रय की l 


भैया मुकेश जी का उल्लेख क्यों हुआ विद्यालय में मन्दिर निर्माण के पीछे बूजी का क्या उद्देश्य रहा होगा जानने के लिए सुनें