26.1.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ शुक्ल पक्ष अष्टमी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 26 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण *१६४२ वां* सार

 आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वा तु परं हर्षमवाप्तवान्।

त्रिराचम्य शुचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्॥29॥


सूर्यदेव का दर्शन कर और  ऋषि अगस्त्य द्वारा बताए गए आदित्यहृदय स्तोत्र का जप करके भगवान् राम ने परम हर्ष का अनुभव किया। इसके पश्चात् उन्होंने तीन बार आचमन किया, स्वयं को शुद्ध किया और तत्पश्चात् वे अपने पराक्रमी धनुष को हाथ में लेकर युद्ध के लिए उद्यत हुए।


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ शुक्ल पक्ष अष्टमी विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 26 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१६४२ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १२४

लक्ष्य- प्राप्ति के लिए संगठन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है प्रेम आत्मीयता के आधार पर उसके विस्तार में जुटे रहें


लक्ष्य न ओझल होने पाए, कदम मिलाकर चल ।

मंजिल तेरे पग चूमेगी, आज नहीं तो कल ॥


हमारे भीतर यह स्वाभाविक जिज्ञासा बनी रहती है कि आज आचार्य जी अपने उद्बोधन में कौन-सा विषय प्रस्तुत करेंगे। यदि उस विषय को हम आत्मसात् कर लें, तो निश्चय ही उससे हमें वास्तविक लाभ प्राप्त होगा। तो आइये आचार्य जी से लाभान्वित होने के लिए प्रवेश करें आज की वेला में



आत्मा अजर और अमर है। वह न कभी जन्म लेती है और न कभी नष्ट होती है। उसे न कोई अस्त्र छेद सकता है और न जल, अग्नि अथवा वायु किसी प्रकार से प्रभावित कर सकते हैं । यही शाश्वत आत्मा कर्म करने के प्रयोजन से इस संसार में देह धारण करती है और अस्थि-मज्जा से निर्मित इस जड़ शरीर को चेतना प्रदान कर उसे पवित्र करती है। वास्तव में आत्मा के बिना शरीर केवल निर्जीव पदार्थ है l आत्मा की शक्ति अवर्णनीय है l आत्मा, जिसे प्राणस्वरूप भी कहा गया है, उसी में परमात्मा का निवास है  और परमात्मा के रहते हम दुःखी कैसे रह सकते हैं हमें अपनी अन्तर्निहित शक्तियों की अनुभूति होनी चाहिए  हम उस दिव्य, प्रकाशस्वरूप, पापनाशक परमात्मा का ध्यान करें, जो समस्त लोकों को प्रकाशित करने वाला है। वह हमारी बुद्धि को सद्बुद्धि की ओर प्रेरित करे, हमारे विचारों को शुद्ध, सत्य और कल्याणकारी बनाए, तथा हमें सन्मार्ग पर चलने की प्रेरणा प्रदान करे। परिस्थितियां अत्यन्त विषम हैं आकर्षणों से भटकें नहीं हम अपने राष्ट्रभक्त जनों के भय भ्रम को दूर करें उन्हें शक्ति सामर्थ्य की अनुभूति कराएं 


इसके अतिरिक्त क्या आचार्य जी ने जाग मछंदर गोरख आया का उल्लेख किया भैया विभास जी, भैया प्रदीप जी, भैया मनीष कृष्णा जी का उल्लेख क्यों हुआ उपनिषद् का क्या अर्थ आचार्य जी ने बताया जानने के लिए सुनें