8.1.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ कृष्ण पक्ष षष्ठी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 8 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण *१६२४ वां* सार -संक्षेप

 ज्ञान का सम्मान करना ही हमारा धर्म है 

 मूलतः अमरत्व  के स्वर का यही शिव मर्म है ॥


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज माघ कृष्ण पक्ष षष्ठी विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 8 जनवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१६२४ वां* सार -संक्षेप

स्थान : ग्राम सरौहां

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १०६

लेखनअवश्य करें क्योंकि यह साधना का एक सूत्र है


जब हम सात्विक संसार में प्रविष्ट होते हैं, तब यह अनुभूति उत्पन्न होती है कि हम पुरुष हैं और इस संसार में पुरुषार्थ करने हेतु आए हैं।  


यद्यपि हमारे भीतर निराशा, कुंठा, व्यथा, ईर्ष्या, दम्भ, लोभ, मोह आदि विकार उपस्थित होते हैं, किन्तु सात्विक दृष्टिकोण के कारण वे हमें व्यथित नहीं करते l हम उन्हें देखते हैं, समझते हैं, किन्तु उनके प्रभाव में नहीं आते।

कभी उत्साह का उत्सव  निराशा की कहानी हूं 

जगत की साधना -सरिता -समय का दिव्य पानी हूं

स्वयं को भूलकर जड़ विन्ध्य जैसा विस्तरण होता

स्वयं को याद कर कैलाश जैसा दिव्य ज्ञानी हूं


मनुष्य के भीतर जड़ता और दिव्यता दोनों की संभावनाएँ हैं  आत्मबोध से ही वह शिवतत्त्व को प्राप्त कर सकता है।ईश्वर की कृपा, भाग्य और इस जीवन की साधना के द्वारा व्यक्ति आनन्द का उपासक हो जाता है वह निराश नहीं रहता l


विषमतम परिस्थितियों को भोगते हुए भगवान् की कृपा और हनुमान जी की सहायता से अद्भुत अखंडव्रती भक्त तुलसीदास जी ने विनय पत्रिका के रूप में एक अद्भुत ग्रंथ  जो मानस की तरह भक्तों का कंठहार है रच डाला जिसके अंतिम पद का मुख्य भाव पूर्ण समर्पण है। तुलसीदास जी यहां आत्मनिवेदन करते हैं कि उन्होंने संसार से नाता तोड़कर केवल प्रभु राम को अपना सर्वस्व मान लिया है। अब वे प्रभु की शरण में हैं और उनकी रक्षा केवल श्रीराम ही कर सकते  हैं यही विनय पत्रिका का मूल संदेश है -ईश्वर की शरण ही अंतिम और सर्वोत्तम मार्ग है।


संसार नाम और रूपों का संघर्षमय क्षेत्र है। यदि कोई मनुष्य इस जीवन-संग्राम में अमर होना चाहता है, तो उसे निरन्तर निःस्वार्थ भाव से प्रखर कर्म करना होगा। 

इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने स्वाध्याय, समर्पण, संयम, साधना, सेवा आदि तत्त्वों को शिक्षा में समाहित होने की आवश्यकता पर बल दिया l 

भैया प्रदीप वाजपेयी जी का उल्लेख क्यों हुआ जानने के लिए सुनें