7.2.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज फाल्गुन कृष्ण पक्ष षष्ठी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 7 फरवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण *१६५४ वां* सार -संक्षेप

 आत्मज्ञान आत्मशक्ति के बिना अधूरा सदा

आन बान शान शौर्य शक्ति की निशानी है,

भौतिक शरीर ही न बलवान हो सका तो

दुनिया जहान सब व्यर्थ की कहानी है।

ज्ञानी चक्रवर्तियों की पुण्य भूमि भारती माँ

कहती रही कि शक्तिहीन नहीं ज्ञानी है,

किन्तु आज की दिशा विहीन दासभाव बुद्धि

शौर्य शक्ति वृत्ति को बना रही मसानी है।


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज फाल्गुन कृष्ण पक्ष षष्ठी विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 7 फरवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१६५४ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १३६

वेद, ब्राह्मण, आरण्यक, उपनिषद्, सूत्र, स्मृति,पुराण आदि  गूढ़ ग्रंथों को ऐसे सरल, सुबोध और सरस रूप में समझा जाए कि सामान्य व्यक्ति भी उनके मर्म को ग्रहण कर सके l  इस प्रकार  यह अद्भुत ज्ञान व्यापक रूप से जनसामान्य तक पहुँच सके हम इसका प्रयास करें


हम सबके बीच एक अत्यन्त मधुर अवर्णनीय भावनात्मक संबंध है l उन्हीं भावनाओं से उद्भूत विचारों को आधार बनाकर हम आगे बढ़ रहे हैं यह भगवान् की कृपा है

 आचार्य जी चाहते हैं कि हमारे हृदय में देशप्रेम, बुद्धि में कुंठा नैराश्य त्यागते हुए आत्मबल का चिंतन और व्यवहार में संगठन करने की योजनाबद्ध कार्यशैली हो। इन तीनों का सामञ्जस्य अद्भुत परिणाम देगा l

हमारे भीतर समाज और राष्ट्र के प्रति समर्पित उन्मुखता सदैव रही है l अपना भारत विविध ऋतुओं के वरदान, अनेक प्रकार की उर्वर मृदाओं, विशाल पर्वतों, पावन नदियों और बहुभाषिक सांस्कृतिक समृद्धि से परिपूर्ण अद्वितीय देश है। इस अनुपम वैभव पर हमें स्वाभिमान होना चाहिए। हमें अपने वास्तविक इतिहास का सम्यक् ज्ञान प्राप्त करना चाहिए तथा आत्मविश्वास के साथ यह स्मरण रखना चाहिए कि हम सदैव संघर्षशील रहे हैं हम कभी पराजित नहीं रहे l

आचार्य जी ने सुदर्शन चक्र जी, प्रो अमरेन्द्र सिंह जी,भैया मनीष जी, भैया पंकज जी, भैया प्रभाकर जी का नाम क्यों लिया,लोकतंत्र की वर्तमान दशा को वैदिक लोकतन्त्र की आकांक्षा के साथ आचार्य जी ने किस कविता में व्यक्त किया  भैया पवन जी को क्या करना चाहिए जानने के लिए सुनें