6.3.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज चैत्र कृष्ण पक्ष तृतीया विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 6 मार्च 2026 का सदाचार संप्रेषण *१६८१ वां* सार -संक्षेप

 गायन्ति देवाः किल गीतकानि

धन्यास्तु ते भारतभूमिभागे।

स्वर्गापवर्गास्पदहेतुभूते

भवन्ति भूयः पुरुषाः सुरत्वात्॥


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज चैत्र कृष्ण पक्ष तृतीया विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 6 मार्च 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१६८१ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १६३

किसी संकल्प को पूर्ण करने के लिए भय और भ्रम का त्याग करें स्वयं आत्मविश्वासी बनकर अपनी संतानों को भी आत्मविश्वासी बनाएं l भारत की विभूतिमत्ता को वृद्धिंगत करने के छोटे छोटे प्रयास करते रहें l 


विषपायी आचार्य जी नित्य प्रयास कर रहे हैं कि हम स्वयं इस सत्य को जानें, उस पर दृढ़ विश्वास रखें और अपनी संतानों को भी यह बताएं तथा आश्वस्त करें कि हमारे देश की परम्परा अत्यन्त महान्,अद्भुत और अलौकिक है। यह परम्परा अनोखी है और इसकी जड़ें अत्यन्त गहरी हैं। हमारा राष्ट्र केवल भौगोलिक सीमा नहीं है, बल्कि एक सनातन सांस्कृतिक चेतना है।

 इसी कारण यह अजर-अमर है और प्रलयकाल तक किसी न किसी रूप में अपना अस्तित्व बनाए रखने का सामर्थ्य रखता है। यहां का प्राकृतिक सौंदर्य अप्रतिम है l यह स्वर्ग धरा है l 


भारत ने शौर्य शक्ति विक्रम को भाषा दी

म्रियमाण जगत को प्राणों की परिभाषा दी।

भारत जब-जब भी कालचक्र के बीच फँसा

विषपायी बनकर कालव्याल पर खूब हँसा ll ४ ll

यदि हम अपना ध्यान निरन्तर राजनेताओं पर ही केन्द्रित कर देंगे और निरर्थक चर्चाओं तथा गपशप पर अधिक ध्यान देंगे, तो हमारा मन व्याकुल और अशान्त हो जाएगा। इसलिए आवश्यक है कि हम अपना मन श्रेष्ठ विचारों, ज्ञान और आत्मचिन्तन की ओर लगाएं , जिससे जीवन में स्थिरता और शान्ति बनी रहे। हम अपने शरीर को साधें जिससे हमें शक्ति प्राप्त होगी हम संगठित भी रहें l 

आचार्य जी ने भैया पुरुषोत्तम जी, भैया आशीष जोग जी, भैया अमित गुप्त जी, भैया राजकुमार जी के नाम क्यों लिए , मौसल पर्व,जिसकी संक्षेप में कथा है कि एक बार साम्ब और अन्य यदुवंशी कुमारों ने ऋषियों का उपहास किया। तब ऋषियों ने शाप दिया कि इनके कारण लोहे का मुसल उत्पन्न होगा और उसी से यदुवंश का विनाश होगा, का उल्लेख क्यों किया अप्रतीक किसका नाम है जानने के लिए सुनें l