21.2.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष चतुर्थी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 21 फरवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण *१६६८ वां* सार

 आत्मानं रथिनं विद्धि शरीरं रथमेव तु ।

बुद्धिं तु सारथिं विद्धि मनः प्रग्रहमेव च ।।

(कठोपनिषद्, अध्याय १, वल्ली ३, मंत्र ३)


इंद्रियाणि हयानाहुर्विषयांस्तेषु गोचरान् ।

आत्मेन्द्रियमनोयुक्तं भोक्तेत्याहुर्मनीषिणः ।।

(कठोपनिषद्, अध्याय १, वल्ली ३, मंत्र ४)


भौतिक भोग्य विषयों के मार्गों पर दौड़ने वाली इन्द्रियाँ घोड़ों के समान हैं। उन पर मन रूपी लगाम के द्वारा बुद्धि रूपी सारथी नियंत्रण रखता है, तभी जीवन की यात्रा संतुलित और सुरक्षित रहती है।


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष चतुर्थी विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 21 फरवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१६६८ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १५०

हमारे आदर्श हैं तत्त्व, शक्ति, विचार, चिन्तन आदि इन्हें ध्यान में रखते हुए हम सब कुछ करने में सक्षम हैं यह अनुभूति करें और उस अनुभूति के आधार पर कर्मरत हो जाएं 


राष्ट्रसेवा, समाजसेवा की साधना में रत आचार्य जी नित्य हमें प्रेरित कर रहे हैं यह हमारा सौभाग्य है हमें उनके प्रति अगाध श्रद्धा रखनी चाहिए ताकि हम दिव्य ज्ञान प्राप्त कर सकें भौतिक चिन्तन के साथ आध्यात्मिक चिन्तन की ओर भी उन्मुखता बनाए रख सकें l हमारे ऋषियों का चिंतन मुख्यतः आध्यात्मिक था। वे ऐहिक सुखों के आकर्षण से परिचित होते हुए भी उन पर विजय पाने का प्रयास करते थे। उनकी जीवन-पद्धति आत्मसंयम और वैराग्य पर आधारित थी, जिससे मनुष्य स्वाभाविक भौतिक आकर्षणों से स्वयं को मुक्त कर सके।ऋषित्व का अर्थ था सत्य का अनुसंधान, इन्द्रिय-निग्रह और उच्च जीवन-मूल्यों की स्थापना l जब राजा वेन अधर्म में प्रवृत्त हुआ और प्रजा का अहित करने लगा, तब ऋषियों ने धर्म और समाज की रक्षा के लिए उसका अंत कर पृथु को शासक बनाया। इससे स्पष्ट होता है कि हमारा ऋषित्व केवल तपस्विता नहीं, बल्कि न्याय और लोककल्याण की दृढ़ भावना से भी युक्त था।यह ऋषित्व शिक्षा का मूल है l हमारी वर्तमान शिक्षा में इसी का अभाव है हमें इसी अभाव को समाप्त करने के प्रयास करने हैं इसी अभाव को समाप्त करने के लिए हमने अपनी संस्था युगभारती के चार आयाम बनाए हैं शिक्षा स्वास्थ्य स्वावलम्बन और सुरक्षा  l ये चारों ही अत्यावश्यक हैं l 



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