प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज फाल्गुन शुक्ल पक्ष द्वादशी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 28 फरवरी 2026 का सदाचार संप्रेषण
*१६७५ वां* सार -संक्षेप
मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १५७
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हमारी आर्ष परम्परा अत्यन्त विलक्षण है। ऋषियों का दर्शन स्पष्ट रूप से यह प्रतिपादित करता है कि आत्मा नश्वर नहीं है, नाश तो केवल शरीर का होता है। जीवन में आने वाले संकटों से हम विमुख नहीं होते, अपितु उनका सामना करते हैं। समय के प्रवाह में कभी उत्साह का अनुभव होता है तो कभी निराशा का, किन्तु आत्मतत्त्व की अखण्डता बनी रहती है।
आचार्य जी दृढ़ विश्वासपूर्वक कहते हैं कि हमारे राष्ट्र की परम्पराएं , रीति-नीतियां और जीवन-दृष्टि अनुपम हैं। यह भूमि अमरत्व-बोध की अधिकारी है, जहां मानव को अपने शाश्वत स्वरूप की अनुभूति कराने की सामर्थ्य विद्यमान है। भारत महान् है l
हम दुनिया के लिये हमेशा हवन जिन्दगी करते हैं
विष पीते हैं स्वयं दूसरों के हित अमृत झरते हैं
स्वागत किया मौत का आगत को न कभी ठुकराया है
कभी न ऐसा भान हुआ अग-जग में कोइ पराया है
किन्तु देवासुर संग्राम से भारत भी कभी अछूता नहीं रहा यह तो चलता ही आ रहा है
जब अधर्म का प्रभाव बढ़ता है और सज्जन पीड़ित होने लगते हैं, तब दैवी शक्ति का अवतरण होता है—ऐसा भारतीय परम्परा का सिद्धान्त है। इसी पृष्ठभूमि में भगवान् राम का अवतार हुआ l
प्रत्येक कार्य की कोई न कोई पृष्ठभूमि अवश्य होती है। उसी प्रकार यह समस्त संसार भी किसी आधार पर स्थित है। कहा जाता है कि जब स्रष्टा एकाकी भाव से स्थित था, तब उसके अंतःकरण में बहुविध सृष्टि की प्रेरणा जाग्रत हुई और उसने संकल्प किया — “मैं एक हूँ, अनेक हो जाऊँ।” यही संकल्प सृष्टि के प्राकट्य का कारण बना।
वास्तव में मन में उत्पन्न होने वाली प्रत्येक कल्पना, विचार और संकल्प भी किसी न किसी पृष्ठभूमि पर आधारित होते हैं भगवान् राम के अवतार से धर्म की पुनः स्थापना हो सकी , राक्षसी प्रवृत्तियों का अंत हो गया और समाज में मर्यादा तथा न्याय की प्रतिष्ठा स्थापित हो सकी l
(फिर) राम-राज्य घर-घर आया हट गयी कंचनी मृग माया
कण-कण आलेकित हुआ लगा मिट गयी अँधेरे की छाया
पर कालव्याल ने करवट ली कुछ उठी क्षितिज पर फिर बदली
वसुधा फिर चढ़ी परीक्षा पर उठ गए सवाल तितिक्षा पर
अँधियारे कोने से सुलगा फिर दबा हुआ मल का गुमान ॥ ६ ॥
भारत महान् भारत महान्...
हा, रामराज्य में आदिशक्ति के निर्वासन का महापाप
भू अतल वितल पाताल प्रकंपित हुआ गगन ने दिया शाप
हे राम ! अकेले राज करो मानव मन का संताप हरो
मानव जीवन को आग लगे तुमको भी इसका दाग लगे
जा विदा शक्ति इस धरती से यह देश बचे बस राम नाम ॥ ७ ॥
इसके अतिरिक्त कुमार विश्वास का नाम किस संदर्भ में आया केजरीवाल की चर्चा क्यों हुई जानने के लिए सुनें