प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज चैत्र कृष्ण पक्ष अष्टमी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 11 मार्च 2026 का सदाचार संप्रेषण
*१६८६ वां* सार -संक्षेप
मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १६८
अधिवेशन और अन्य कार्यक्रमों को प्रभावशाली ढंग से करें
जब हम भारत के इतिहास को तटस्थ और निष्पक्ष दृष्टि से देखते हैं, तब यह स्पष्ट अनुभव होता है कि इस राष्ट्र ने असंख्य झंझावातों, आक्रमणों और विपत्तियों का सामना किया है। किन्तु साथ ही ऐसा भी प्रतीत होता है मानो परमात्मा स्वयं इस देश की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध है। इसी कारण कितनी ही कठिन परिस्थितियां क्यों न आई हों, भारत की जीवनधारा कभी रुकी नहीं,वह बार-बार अद्भुत शक्ति के साथ उठकर आगे बढ़ती रही है।
हमारा भारत देश अद्भुत अनादि और अनन्त है l हमें झंझावातों से भयभीत नहीं होना है और न ही निश्चिन्त होकर बैठना है l
भारत महान भारत महान
जग गाता था, गा रहा नहीं, गाएगा फिर पूरा जहान...
हम राष्ट्रभक्त केवल स्वयं जाग्रत न रहें, बल्कि समाज को भी जाग्रत करें। हम राष्ट्र की चेतना के प्रहरी बनें और अपने आचरण तथा ज्ञान से समाज को सही दिशा प्रदान करें। इसके लिए हम युगभारती के रूप में संगठित हुए हैं जब हम कोई भी कार्यक्रम करें तो उसे अत्यन्त प्रभावशाली ढंग से करें कार्यक्रम जितना अधिक प्रभावशाली होगा उतनी ही समाज में हमारी चर्चा होगी और लोग हमारी ओर आकर्षित होंगे तब हम अपने सत्य को उजागर कर सकते हैं और भारती भावों से अड़कर तथा तथाकथित अपनों से लड़कर लोगों को विश्वास दिला सकते हैं कि वे भयभीत न हों *हम उनका सहारा हैं*
इसके अतिरिक्त छोटापन क्यों अच्छा है भैया सौरभ द्विवेदी जी का उल्लेख क्यों हुआ,
स यथोर्णवाभिस्तन्तुनोच्चरेद्यथाऽग्नेः क्षुद्रा विस्फुलिङ्गा व्युच्चरन्त्येवमेवास्मादात्मनः सर्वे प्राणाः सर्वे लोकाः सर्वे देवाः सर्वाणि भूतानि व्युच्चरन्ति तस्योपनिषत्सत्यस्य सत्यमिति प्राणा वै सत्यं तेषामेष सत्यम्॥ का उल्लेख कर आचार्य जी ने क्या समझाने की चेष्टा की जानने के लिए सुनें