आप सभी राष्ट्रभक्तों को नववर्ष की मंगलकामनाएं
प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 19 मार्च 2026 का सदाचार संप्रेषण
*१६९४ वां* सार -संक्षेप
मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १७६
संगठन में अनुशासन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है
यह संसार एक अथाह सागर के समान है, जिसमें जीवन निरन्तर प्रवाहमान है। इस जीवनरूपी सागर में निरन्तर आगे बढ़ते रहने और उसे पार करने की शक्ति हमें प्राप्त हो आचार्य जी नित्य इसका प्रयास करते हैं ताकि हम संघर्षों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य तक पहुँच सकें।
लक्ष्य तक पहुँचे बिना, पथ में पथिक विश्राम कैसा
लक्ष्य है अति दूर दुर्गम मार्ग भी हम जानते हैं,
किन्तु पथ के कंटकों को हम सुमन ही मानते हैं,
जब प्रगति का नाम जीवन, यह अकाल विराम कैसा ।
हमारे हृदय में बिना किसी लाभ लोभ के माँ भारती के प्रति आजीवन पवित्र और निष्कलुष भक्ति बनी रहे। हमारा जीवन राष्ट्रसेवा और राष्ट्रभक्ति में समर्पित हो हम सुशिक्षित हों अपनी परम्परा को जानें और उसके प्रति गर्व की अनुभूति करें आचार्य जी नित्य प्रयत्नशील रहते हैं l
हम अपने आचरण, विचार और व्यवहार को इस प्रकार ढालें कि वह वेद, उपनिषद्, स्मृतियों और ऋषियों की शिक्षाओं के अनुरूप हो इसके लिए आचार्य जी अपना बहुमूल्य समय दे रहे हैं हमें लाभ उठाना चाहिए l वास्तव में आर्ष परम्परा अद्भुत है l
हमारी आर्ष परम्परा सदैव यही चाहती है कि जो लोग बुरी प्रवृत्तियों में फँसे हुए हैं, उन्हें सद्बुद्धि प्राप्त हो, जिससे वे अपने कुसंस्कारों को त्यागकर सन्मार्ग का अनुसरण करें। जो लोग भटके हुए हैं, उन्हें उस भ्रम से निवृत्ति प्राप्त हो और वे सही दिशा को समझ सकें।
आचार्य जी ने आगामी अधिवेशन हेतु ११ व १२ अप्रैल को दिल्ली में होने वाली बैठक की चर्चा करते हुए क्या परामर्श दिया
एकत्रीकरण का क्या महत्त्व है एक सज्जन कैलाश जी की आचार्य जी ने क्यों चर्चा की जानने के लिए सुनें