22.3.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज चैत्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 22 मार्च 2026 का सदाचार संप्रेषण *१६९७ वां* सार -संक्षेप

 प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज चैत्र शुक्ल पक्ष चतुर्थी विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 22 मार्च 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१६९७ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १७९

सितम्बर २०२६ में दिल्ली में होने जा रहे राष्ट्रीय अधिवेशन के लिए  युगभारती के हम सदस्यों की अधिक से अधिक संख्या हो इसका प्रयास प्रारम्भ कर दें 




यह हमारा सौभाग्य है कि आचार्य जी निरन्तर प्रयत्नशील हैं कि हम सब  उनके मानस- पुत्र शक्ति,बुद्धि, विचार, कौशल तथा आत्मविश्वास से सम्पन्न बनें। उनका उद्देश्य केवल बाह्य विकास नहीं, अपितु हमारे अन्तःकरण का जागरण भी है। वे चाहते हैं कि हममें से प्रत्येक  मानस-पुत्र अनुभव करे कि वह साधारण नहीं है l यद्यपि शरीर मिट्टी के एक सामान्य खिलौने के समान प्रतीत होता है, किन्तु उसके भीतर एक अत्यन्त विलक्षण, दिव्य और चेतन तत्त्व विद्यमान है इसका उसे अनुभव हो l इस अनुभूति के जाग्रत होते ही हमारे भीतर आत्मसम्मान, उत्तरदायित्व और उत्कृष्टता की भावना उत्पन्न होगी और हम अपने जीवन को उच्च उद्देश्यों की पूर्ति के लिए समर्पित करने का मन बना लेंगे l 

इन दिव्य पवित्र भावों के साथ जब हम संगठन में उतरेंगे तो परस्पर एक-दूसरे से चिढ़ना और कुढ़ना छोड़ देंगे और तब संगठन में प्रेम, आत्मीयता और सद्भाव का स्वाभाविक रूप से विस्तार होगा। इससे आपसी विश्वास दृढ़ होगा और हम सब मिलकर एक सशक्त, तथा सौहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण कर सकेंगे l ऐसे संगठन के माध्यम से हम राष्ट्र को परम वैभव पर पहुंचाने में सहयोग कर सकेंगे l


मनुष्य जिस संगति में रहता है, उसका सीधा प्रभाव उसके विचारों, आचरण और व्यक्तित्व पर पड़ता है। इसलिए श्रेष्ठ, सदाचारी और प्रेरणादायक व्यक्तियों का साथ अपनाकर ही हम अपने जीवन को उन्नत, संतुलित और आदर्श बना सकते हैं l 


बालमीक नारद घटजोनी। निज निज मुखनि कही निज होनी॥

जलचर थलचर नभचर नाना। जे जड़ चेतन जीव जहाना॥2॥

मति कीरति गति भूति भलाई। जब जेहिं जतन जहाँ जेहिं पाई॥

सो जानब सतसंग प्रभाऊ। लोकहुँ बेद न आन उपाऊ॥3॥


ऋषि वाल्मीकि,नारद, अगस्त्य ऋषि आदि ने अपने अनुभव से बताया है कि इस संसार में जितने भी जड़-चेतन, जल, थल और आकाश में रहने वाले जीव हैं—उनकी बुद्धि, यश, स्थिति, संपत्ति और भलाई जहाँ-जहाँ और जैसे-जैसे बढ़ी है, वह सब सत्संग के प्रभाव से ही प्राप्त हुई है।


इसके अतिरिक्त आचार्य जी की साबर मन्त्रों के बारे में किससे चर्चा हुई आज सरौहां में कौन सा कार्यक्रम होने जा रहा है भैया अखिलेश तिवारी जी १९८८ बैच को प्रयास केंद्र में आचार्य जी ने क्या परामर्श दिया शिव जी की कृपा क्यों आवश्यक है जानने के लिए सुनें