9.3.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज चैत्र कृष्ण पक्ष षष्ठी विक्रमी संवत् २०८२ तदनुसार 9 मार्च 2026 का सदाचार संप्रेषण *१६८४ वां* सार

 प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज चैत्र कृष्ण पक्ष षष्ठी विक्रमी संवत् २०८२  तदनुसार 9 मार्च 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१६८४ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १६६

अध्ययन स्वाध्याय के प्रति रुचि जाग्रत करें 


संस्कार विविध प्रकार से दिए जा सकते हैं। सनातन धर्म में इस विषय पर अत्यन्त गहन चिन्तन तथा व्यापक कार्य हुआ है। इसी चिन्तन के परिणामस्वरूप अनेक ग्रन्थों का निर्माण हुआ, जिनकी परम्परा

ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद नामक चार वेदों से प्रारम्भ होती है l प्रत्येक वेद का प्रथम भाग संहिता कहलाता है, जिसमें देवताओं की स्तुतियाँ और मन्त्र संकलित हैं। संहिता के बाद ब्राह्मण ग्रन्थ आते हैं, जिनमें यज्ञों की विधि और कर्मकाण्ड का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया है। ब्राह्मणों के बाद आरण्यक ग्रन्थों का स्थान है, जिनमें वन में रहकर किए जाने वाले चिन्तन और साधना का वर्णन मिलता है तथा जो मनुष्य को कर्मकाण्ड से ध्यान और आध्यात्मिक विचार की ओर ले जाते हैं। आरण्यकों के अन्त में उपनिषद् आते हैं, जिनमें आत्मा, ब्रह्म और परम सत्य के विषय में गहन तत्त्वचिन्तन किया गया है, इसलिए इन्हें वेदान्त भी कहा जाता है। आगे चलकर इन्हीं वेदों के सिद्धान्तों को कथा और इतिहास के रूप में समझाने के लिए अनेक महाग्रन्थों की रचना हुई। भक्ति और आदर्श जीवन को सामान्य जन तक पहुँचाने के लिए पुराणों और भक्तिकालीन ग्रन्थों की रचना हुई l दुर्भाग्य से हमारे राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मानस को विकृत करने के लिए विभिन्न आक्रान्ताओं द्वारा समय-समय पर अनेक प्रयास किए गए और इसमें वे सफल भी हुए हम उनके बिछाए जाल में फंसते चले गये l हम उन ग्रंथों को क्लिष्ट  और अनुपयोगी मानकर उनसे दूरी बनाने लगे जबकि यथार्थ में वे अत्यन्त ज्ञानवर्धक व्यावहारिक और उपयोगी हैं हमें इस ओर ध्यान देने की आवश्यकता है  अध्ययन के प्रति रुचि जाग्रत करने के लिए 

पुस्तकालय महत्त्वपूर्ण हैं  जो संस्कार के विशिष्ट केन्द्र हैं जहाँ विविध विषयों की पुस्तकों, पत्र-पत्रिकाओं और ज्ञानवर्धक सामग्री का संग्रह रहता है l  भैया सौरभ द्विवेदी जी ( २००० बैच ) के ऐसे ही एक पुस्तकालय 

*माता प्रसाद  पुस्तकालय ग्राम चमारी थाना आटा जनपद जालौन* का कल लोकार्पण समारोह हुआ  जिसमें युगभारती के अनेक सदस्य पहुंचे l



इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने उन्नाव वाले अपने घर का उल्लेख क्यों किया अध्ययन के प्रति रुचि जाग्रत करने के लिए आचार्य जी ने क्या सुझाव दिए, वाङ्मय मूर्तियां क्या हैं  धारा काटना क्यों महत्त्वपूर्ण है जानने के लिए सुनें l