10.11.23

आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का कार्तिक मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी विक्रम संवत् 2080 तदनुसार 10 नवम्बर 2023 का सदाचार संप्रेषण

 काक चेष्टा बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च ।

अल्पाहारी गृह त्यागी, विद्यार्थी पञ्च लक्षणम् ॥

प्रस्तुत है उदारात्मन् ¹ आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का आज कार्तिक मास कृष्ण पक्ष त्रयोदशी विक्रम संवत् 2080 तदनुसार 10 नवम्बर 2023 का सदाचार संप्रेषण
  *834 वां* सार -संक्षेप

 1 विशालहृदय

उठो उत्साह का उत्सव मनाओ
कि अपने आत्म का स्वर गुनगुनाओ
शरीरी वज्र को फिर से सजाओ
नियम संयम स्वरों को साध जगवीणा बजाओ

हम सांसारिक ज्ञान के साथ आत्मशक्ति आत्मबोध आदि का भी ध्यान रखें आचार्य जी प्रतिदिन इसी का प्रयास करते हैं इसीलिए शौर्यप्रमंडित अध्यात्म की ओर उन्मुख करने वाली इन वेलाओं का महत्त्व बढ़ जाता है प्रसुप्त मनीषा जाग्रत हो हमारा ऋषित्व जाग्रत हो इसी का प्रयास चलता रहा है यही भारतीय जीवन दर्शन है
आचार्य जी हमें परामर्श देते हैं कि हम अपने शरीर को जगाएं मन को जगाएं विचारों को जगाएं अपने आत्म को जगाएं
और फिर हम एक से एक कमाल कर सकते हैं


हम प्रयास करें कि हमारा मालिन्य मिटा रहे,सन्मार्ग पर चलने का प्रण लेकर पौरुष और पराक्रम को पूजें , पथभ्रष्ट न हों,मनुष्यत्व की अनुभूति करते हुए समाज -हित और राष्ट्र -हित के कार्य अवश्य करें , परस्पर प्रेम आत्मीयता का भाव रखें, वर्तमान समय में संगठन अतिमहत्त्वपूर्ण है इसे समझें,आस्तीन के सांपों से सदैव सावधान रहने की आवश्यकता है इस पर ध्यान दें दुष्टों से सामना करते समय अग्नि के समान दिखें, सकारात्मक सोच के लिए आवश्यक उपाय करते रहें

यही समय है हमें आत्मचिन्तन करने की आवश्यकता है कि कैसे अस्ताचल देशों से प्रभावित होकर हम भ्रमित हो गए और अब तो कम से कम उस भ्रम को हम तोड़ने की दिशा में अग्रसर हो जाएं
३ जनवरी २०१० को आचार्य जी द्वारा लिखी
चर्चा है अपना देश प्रगति के पथ पर है.....
कविता की इन पंक्तियों को देखिए
भावों के उमड़ते स्वर अद्भुत बन गए हैं


*शिक्षा नासमझी भरी परायी नकल मात्र*
*भाषा भावों के बिना रटाई जाती है*
*इतिहास और नैतिक शिक्षा के पाठों से*
*अपनेपन की पहचान मिटाई जाती है*

इस कविता की शेष पंक्तियों को जानने के लिए सुनें