11.11.23

आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का कार्तिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी विक्रम संवत् 2080 तदनुसार 11 नवम्बर 2023 का सदाचार संप्रेषण

 रामकथा मंदाकिनी चित्रकूट चित चारु।

तुलसी सुभग सनेह बन सिय रघुबीर बिहारु॥ 31॥

प्रस्तुत है उदारचेतस् ¹ आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का आज कार्तिक मास कृष्ण पक्ष चतुर्दशी विक्रम संवत् 2080 तदनुसार 11 नवम्बर 2023 का सदाचार संप्रेषण
  *835 वां* सार -संक्षेप

 1 विशालहृदय

भारतीय जीवन दर्शन अद्भुत है लेकिन जब हम भ्रमित हो जाते हैं तो लगता है हम इसके दर्शन नहीं कर पाए क्योंकि हमने अपना विचार व्यवहार सामञ्जस्यपूर्ण नहीं रखा

जिसके कारण लोभ मोह काम क्रोध मद मत्सर नामक छः दोष हमें नष्ट करने के लिए प्रबल हो गए

इन सदाचार वेलाओं के माध्यम से आचार्य जी हमें अत्यन्त तत्त्वपूर्ण भारतीय जीवन दर्शन वैदिक ज्ञान सनातन धर्म का दर्शन कराते हैं जिससे हमारे उत्साह में वृद्धि होने लगे हम समाज और देश को भारतीय जीवन दर्शन के आधार पर समझने का प्रयास करने लगें अपनी मनीषा को जाग्रत करने की ओर हम अग्रसर होने लगें
एक महापुरुष के मन में प्राणिक ऊर्जा से परिपूर्ण दीनदयाल विद्यालय की आवश्यकता उद्भूत होने के पीछे भी यही कारण है कि हम सनातन धर्म की महत्ता को समझें हमारा व्यक्तित्व राष्ट्रनिष्ठा से परिपूर्ण हो समाजोन्मुखी हो
इस विद्यालय में अंकित हमें यह ध्यॆय वाक्य आज भी याद है
" प्रचण्ड तेजोमय शारीरिक बल, प्रबल आत्मविश्वास युक्त बौद्धिक क्षमता एवं निस्सीम भाव सम्पन्ना मनः शक्ति का अर्जन कर अपने जीवन को निःस्पृह भाव से भारत माता के चरणों में अर्पित करना ही हमारा परम साध्य है l
परमात्मा माया का अधिष्ठाता है सृष्टि का कर्ता है उसकी स्थिति और प्रलय का संचालक है हमें अपना जीवन परमात्माश्रित रखना चाहिए
हम भ्रम भय आदि का त्यागकर पुनः उस सुहावने सत्य सनातन पथ पर चलने की दिशा में अपने कदम बढ़ा लें
जिससे भ्रष्ट लोग हटने का प्रयास करेंगे,हम लोग स्वावलम्बी बनेंगे आत्मबोध से युक्त होंगे मनुष्यत्व की अनुभूति करेंगे हम डगमग पांवों का सहारा बनेंगे
इन भावों को आचार्य जी ने सन् २००९ में लिखी अपनी इस कविता में व्यक्त किया है
जो निश्चित रूप से हम लोगों को आनन्दित करेगी

राही फिर से राह बनानी........

आचार्य जी परामर्श दे रहे हैं कि
हम भी अपने भावों को उकेरें
और उन्हें पढ़ें ये संकटों में हमारी सहायता करेंगे
अपने कार्यव्यवहार में रुचि लेते हुए अपने लक्ष्य को पाने की दिशा में अग्रसर हों

इसके अतिरिक्त श्रद्धेय भाउराव जी के किस प्रसंग की आचार्य जी ने चर्चा की श्यामा पक्षी कहां दिख सकता है जानने के लिए सुनें