प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज चैत्र शुक्ल पक्ष षष्ठी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 24 मार्च 2026 का सदाचार संप्रेषण
*१६९९ वां* सार -संक्षेप
मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १८१
आगामी दिल्ली अधिवेशन हेतु जो विषय अर्थात् शिक्षा को हमने चुना है उस पर गम्भीरता से अध्ययन प्रारम्भ कर दें
वाराणसी से *शिक्षा संग्रह* नामक ग्रंथ की खोज करें जिससे प्रचुर मात्रा में सामग्री मिल जाएगी
हमारा “युगभारती” नामक संगठन जिसका लक्ष्य है *राष्ट्रनिष्ठा से परिपूर्ण समाजोन्मुखी व्यक्तित्व का उत्कर्ष* मित्रों का एक विशिष्ट समूह है।हमें प्रयास करना चाहिए कि हम केवल नाममात्र के मित्र न रहें, बल्कि उच्च आदर्शों को अपने व्यवहार में उतारें, जिससे “युगभारती” एक सशक्त, आत्मीय और अनुकरणीय संगठन के रूप में प्रतिष्ठित हो सके।भर्तृहरि ने सच्चे मित्रों के लक्षण बताए हैं
पापान्निवारयति योजयते हिताय, गुह्यं निगूहति गुणान् प्रकटीकरोति।
आपद्गतं च न जहाति ददाति काले, सन्मित्रलक्षणमिदं प्रवदन्ति सन्तः।।
सज्जन पुरुष कहते हैं कि सच्चे मित्र का लक्षण यह है कि वह अपने मित्र को पाप से दूर रखे l सिगरेट पीना और मद्यपान करना हानिकारक तथा पतन की ओर ले जाने वाले आचरण हैं। सच्चा मित्र वही होता है, जो अपने साथी को ऐसे दुर्व्यसनों से दूर रखे और उसे सदाचार तथा स्वस्थ जीवन की ओर प्रेरित करे।
मुनिगन निकट बिहग मृग जाहीं। बाधक बधिक बिलोकि पराहीं॥
हित अनहित पसु पच्छिउ जाना। मानुष तनु गुन ग्यान निधाना॥2॥
पशु-पक्षी भी अपने हितैषी और अहितकारी में भेद कर लेते हैं। जब उनमें इतनी पहचान की क्षमता है, तो मनुष्य, जो गुण, बुद्धि और ज्ञान से परिपूर्ण है, उसे तो और भी अधिक विवेकपूर्ण आचरण करना चाहिए।
वह मित्र के गुप्त दोषों को छिपाए , परन्तु उसके गुणों को सबके सामने बार बार प्रकट करता रहे । संकट के समय वह अपने मित्र का साथ न छोड़े और उचित समय पर उसकी सहायता भी करे l
इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने बताया शब्द के अभाव में ज्ञान का प्रकाशत्व लुप्त हो जाता है शब्द ब्रह्म है वाणी का आधार है शब्द l यह जीवन का विधि विधान है l
भैया पंकज जी का उल्लेख क्यों हुआ लोकभाषा की क्या सीमाएं हैं जानने के लिए सुनें