रामनवमी की हार्दिक शुभकामनाएं
भए प्रगट कृपाला, दीनदयाला, कौसल्या हितकारी ।
हरषित महतारी, मुनि मन हारी, अद्भुत रूप बिचारी ll
प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज चैत्र शुक्ल पक्ष नवमी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 27 मार्च 2026 का सदाचार संप्रेषण
*१७०२ वां* सार -संक्षेप
मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १८४
आगामी अधिवेशन का जो हमारा विषय है शिक्षा उस पर चर्चा अवश्य करें , लेखन भी प्रारम्भ कर दें
भारतवर्ष ऐसा दिव्य विलक्षण स्थान है जहां किसी न किसी रूप में महापुरुष अवतार लेते हैं और अपना अमिट प्रभाव छोड़ जाते हैं महापुरुषों के अवतार तथा भारत की आर्ष परम्परा, यह सिद्ध करती है कि जब-जब मानव जीवन दिशा से भटकता है, तब-तब दिव्य पुरुष और ऋषि-मुनि जन्म लेकर अपने ज्ञान, तप और आदर्शों से समाज को पुनः सही मार्ग पर स्थापित करते हैं भारत की आर्ष परम्परा ऐसी दिव्य धारा है, जिसमें ऋषियों ने अपनी साधना के बल पर शाश्वत सत्य का अनुभव किया और उसी अनुभूत ज्ञान को वेदों के रूप में मानवता को प्रदान किया l ऐसी विशिष्ट शक्ति है साधना l
साधना,संघर्ष संयम की कहानी
साधना, संतोष शुचिता की निशानी
साधना, विश्वास-वैभव का फलक है
साधना, निर्लिप्त कर्मों की झलक है
साधना, मानव-मनीषा का सुफल है साधनामय आज यशप्रद दिव्य कल है ll
वेदों, उपनिषदों आदि भारत के ग्रंथों से प्राप्त शिक्षा यह सिखाती है कि मनुष्य का वास्तविक उद्देश्य केवल भौतिक उन्नति नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नयन और परम सत्य की प्राप्ति है। शिक्षा ज्ञान है ध्यान है विश्वास है आत्मशक्ति है ऐसी शिक्षा से शिक्षित व्यक्ति निराश नहीं होता
इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय विद्यालय औरास,जिसके अध्यक्ष हैं आचार्य जी,की चर्चा क्यों हुई, भैया मुकेश के घर से आचार्य जी कौन सा ग्रंथ लाए, भैया मनीष जी ने आचार्य जी की किन भैयाओं से बात कराई, आचार्य जी ने *अपने दर्द मैं दुलरा रहा हूं* की किस काव्य रचना का उल्लेख किया, अधिवेशन के लिए हमें और किन लोगों को चलने के लिए प्रेरित करना चाहिए जानने के लिए सुनें l