31.3.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज चैत्र शुक्ल पक्ष त्रयोदशी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 31 मार्च 2026 का सदाचार संप्रेषण *१७०६ वां* सार

 विधाता का प्रथम पावन सुमंगल यज्ञ है हिन्दू, 

कि वैदिक ज्ञान से परिपूर्ण जग का तज्ञ है हिन्दू। 

उठो भ्रम भय तजो कर्मानुरागी तत्व को जानो,

अरे ओ! हिन्दुओ जागो उठो हिन्दुत्व को मानो ॥


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज चैत्र शुक्ल पक्ष त्रयोदशी विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 31 मार्च 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१७०६ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १८८

हम युगभारती के सदस्य एक इकाई के रूप में जो भी समाजोन्मुखी कार्य करते हैं वह भी युगभारती के हित में ही है ऐसा मानकर हमें उस सदस्य को उत्साहित करना चाहिए l

पढ़ाई लिखाई का सदुपयोग भी आवश्यक है इसे समझने की चेष्टा करें और कर्मरत हो जाएं l

 


सोद्देश्यपूर्ण इन सदाचारमयी विचारों को सुनकर हमें अपने जीवन में उच्च आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा लेनी चाहिए। हमें सत्य, न्याय और धर्म के मार्ग पर दृढ़ता से चलते हुए अन्याय और अत्याचार का साहसपूर्वक विरोध करना चाहिए तथा अपने आचरण को इतना शुद्ध और श्रेष्ठ बनाना चाहिए कि वह  सनातनधर्मी समाज के लिए भी अनुकरणीय बन सके।

हमने अपना लक्ष्य बनाया है 

"राष्ट्र -निष्ठा से परिपूर्ण समाजोन्मुखी व्यक्तित्व का उत्कर्ष "


हम हिन्दू हैं हिन्दू केवल एक पहचान नहीं, बल्कि निरंतर संघर्ष और आत्मसम्मान की गौरवपूर्ण परंपरा का प्रतीक है। यह उस जीवन दृष्टि का नाम है जो कठिनाइयों के बीच भी अपने धर्म, संस्कृति और मूल्यों की रक्षा करते हुए आगे बढ़ती है। हिन्दू परंपरा विश्व में अपने विजयशाली इतिहास और श्रेष्ठ आचरण के कारण प्रसिद्ध रही है। यह अन्याय और अत्याचार को सहन करने वाली नहीं, बल्कि उसके विरुद्ध खड़े होकर उसका प्रतिरोध करने वाली शक्ति का नाम है। साथ ही, जो सनातन धर्म के विरोध में खड़ा होता है, उसके विरुद्ध दृढ़ता और सामर्थ्य के साथ आवाज उठाना भी हिन्दू होने का एक महत्त्वपूर्ण पक्ष है।

सतत संघर्ष की गौरव-कथा का नाम हिन्दू है,

जगद्विख्यात दिग्विजयी प्रथा का नाम हिन्दू है।

किसी अन्याय अत्याचार का प्रतिरोध हिन्दू है,

सनातनधर्म द्रोही का सशक्त विरोध हिन्दू है ॥


समूचे विश्व का कल्याणकामी एक हिन्दू है, 

जगत में ख्यात मानव जाति भर में नेक हिन्दू है। 

महाज्ञानी विधानी सत्यसंधानी प्रखर हिंदू, 

भ्रमित जग को भ्रमों से दूर करता है मुखर हिन्दू ॥


इसके अतिरिक्त आदर्शोन्मुख यथार्थवाद क्या है, भैया अजय शंकर जी का उल्लेख क्यों हुआ जानने के लिए सुनें