10.4.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज वैशाख कृष्ण पक्ष अष्टमी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 10 अप्रैल 2026 का सदाचार संप्रेषण *१७१६ वां* सार -संक्षेप

 न गृहं गृहमित्याहुर्गृहिणी गृहमुच्यते।

गृहं तु गृहिणीहीनं कान्तारादतिरिच्यते॥


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज वैशाख कृष्ण पक्ष अष्टमी विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 10 अप्रैल 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१७१६ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १९८

अपने अंतःकरण के विचारों और व्यवहार को शुद्ध एवं पवित्र बनाए रखें आहार-विहार के संबंध में उचित-अनुचित का विवेक बनाए रखें और सदैव इस पर सजग दृष्टि रखें इसके लिए Society को इंगित न करें । अपने आचरण तथा वाणी में कटुता का परित्याग करें और मधुरता एवं विनम्रता को अपनाएँ।



यह हमारा सौभाग्य है कि हम प्रतिदिन इन वेलाओं से सदाचारमय विचार ग्रहण कर रहे हैं ताकि हमारा अंतःकरण शुद्ध एवं पवित्र बना रहे, विवेक जाग्रत हो और हमारा आचरण तथा वाणी सदैव मधुर, विनम्र और कल्याणकारी बनी रहे।

हमें चाहिए कि हम उन व्यक्तियों को अपने निकट स्थान दें, जो हमारे हित, उन्नति और कल्याण की भावना रखते हैं। ऐसे लोग न केवल सही मार्गदर्शन करते हैं, अपितु कठिन परिस्थितियों में भी सहायक बनकर जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने में योगदान देते हैं।

इसके विपरीत, जो व्यक्ति अहित की भावना रखते हैं, भ्रम उत्पन्न करते हैं या अनुचित मार्ग की ओर प्रेरित करते हैं, उनसे यथासंभव दूरी बनाए रखना ही उचित है। ऐसे लोगों का संग न केवल विचारों को दूषित करता है, बल्कि जीवन की दिशा को भी विचलित कर सकता है l

हमारे राष्ट्र की शिक्षा अत्यन्त विलक्षण थी जिसके कारण आज भी हम जीवित हैं जाग्रत हैं उत्साहित हैं और चैतन्ययुक्त हैं l हम गृहस्थाश्रमी हैं और गृह में पत्नी के साथ रहते हैं। पत्नी का स्थान सर्वोपरि है l पत्नी को ‘गृह’ भी कहा गया है, क्योंकि वही घर की आधारशिला, व्यवस्था और जीवन-संवेदना का केंद्र होती है। उसके बिना घर केवल एक भवन मात्र रह जाता है, जिसमें न आत्मीयता होती है, न ही जीवंतता।“बिन घरनी घर भूत का डेरा”, अर्थात् पत्नी के बिना घर सूना, निर्जीव और शून्य-सा प्रतीत होता है।


इसके अतिरिक्त उपकुर्वाण ब्रह्मचारी और नैष्ठिक ब्रह्मचारी में क्या अन्तर है, आचार्य जी दिल्ली क्यों जा रहे हैं, ज्येष्ठाश्रम क्या है द्विज क्या है अभिनन्दनीय कर्म क्या हैं श्वानवृत्ति क्या है जानने के लिए सुनें