12.4.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज वैशाख कृष्ण पक्ष दशमी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 12 अप्रैल 2026 का सदाचार संप्रेषण *१७१८ वां* सार -संक्षेप

 संगठन के प्रति उदास रहो नहीं 

संगठन संसार का आधार है। 

संगठन सहयोग से ही सृष्टि है, 

संगठन ही मनुज का सुखसार है ॥

  है समाज वही सुखी जो संगठित

  हर अकेला भ्रमित पीड़ित दुखी है 

  शास्त्र अपना यही कहता आ रहा

  संगठित व्यक्तित्व ही मन्मुखी है ॥


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज वैशाख कृष्ण पक्ष दशमी विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 12 अप्रैल 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१७१८ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं २००


जब पदाधिकारी अपने कार्यकर्ताओं पर अटूट विश्वास रखते हैं, तो कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास और उत्साह बढ़ता है। वे अपने दायित्वों को अधिक निष्ठा और समर्पण के साथ निभाते हैं। इसी प्रकार, साधारण सदस्य भी यदि एक-दूसरे पर विश्वास रखें, तो आपसी सहयोग और एकता शक्ति उत्पन्न करती है। हम आत्मविश्वासी भी बनें l 

आत्मोन्नाति के उपायों में डायरी लेखन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है l

आगामी अधिवेशन के लिए उत्साह से संपन्न होकर कार्यों में सहयोग प्रारम्भ कर दें l 



अद्भुत है हमारा सनातन धर्म l इसका मूल स्वरूप अत्यन्त लचीला, व्यापक और जीवनोपयोगी है। इसमें कर्मकाण्ड केवल कठोर नियमों का बंधन नहीं, बल्कि साधना का मार्गदर्शन है। उदाहरणार्थ यदि पूजा में पुष्प उपलब्ध न हों, तो अक्षत अर्पित करने का विकल्प दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि धर्म बाहरी सामग्री से अधिक भाव और श्रद्धा को महत्व देता है। वस्तु का अभाव साधना में बाधा न बने, इसलिए विकल्प की व्यवस्था रखी गई है।

यह धर्म मनुष्य को शृंखला में नहीं बांधता, बल्कि उसे विचार करने की स्वतंत्रता देता है। वह यह सिखाता है कि परिस्थिति के अनुसार अपने आचरण को कैसे ढालना चाहिए। नियम मार्गदर्शक हैं, परन्तु उनका उद्देश्य जीवन को सरल और संतुलित बनाना है, न कि उसे कठिन बनाना। पूजन में बैठने का निर्देश अवश्य दिया जाता है वह इस कारण कि मनुष्य एकाग्र होकर अपने भीतर झाँक सके और उस परम सत्ता का स्मरण कर सके, जो इस सृष्टि की रचना करने वाली है। हम इस संसार में उपस्थित हैं, परन्तु हमारा अस्तित्व किसी उच्चतर शक्ति पर आधारित है। पूजन उसी शक्ति के प्रति कृतज्ञता, श्रद्धा और स्मरण का माध्यम है।


भैया संजय गर्ग जी, भैया शुभेन्दु शेखर जी, भैया रमेश गुप्त जी,  न्यायमूर्ति भैया सुरेश गुप्त जी, भैया पुनीत जी, भैया अरविन्द जी, भैया वीरेन्द्र त्रिपाठी जी, भैया मनीष कृष्णा जी का उल्लेख क्यों हुआ,आज दिल्ली के कार्यकर्ताओं की बैठक में लगभग कितने लोग उपस्थित होने वाले हैं कल  गुरुग्राम के कार्यक्रम में कितने सदस्य उपस्थित रहे, आगामी अधिवेशन के कार्यक्रम स्थल की चर्चा क्यों हुई,  स्वामी प्रेमानन्द के गांव का नाम किस कारण आया, देशभक्ति क्यों आवश्यक है जानने के लिए सुनें l