4.4.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज वैशाख कृष्ण पक्ष द्वितीया विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 4 अप्रैल 2026 का सदाचार संप्रेषण *१७१० वां* सार -संक्षेप

 प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज वैशाख कृष्ण पक्ष द्वितीया विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 4 अप्रैल 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१७१० वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं १९२

इन संप्रेषणों को सुनकर एक अपनी रुचि का विषय चुन लें जैसे सेवा और सेवा इस प्रकार की करें कि 


सेवा में जितना प्रेम समन्वित होता है 

सेवक उतना भावों से अन्वित होता है 

भावना विहीन कर्म 

बस एक प्रदर्शन है 

मानव जीवन निज भावों का ही दर्शन है ॥

और कर्मरत हो जाएं l



यह हमारा सौभाग्य है कि हमें आचार्य जी के रूप में एक सक्षम गुरु का संरक्षण प्राप्त है हमें इसका लाभ उठाना चाहिए l आचार्य जी परामर्श दे रहे हैं कि प्रतिदिन प्रातः थोड़ा समय हम आत्मचिंतन (आत्मदर्शन) के लिए निकालें अर्थात् हम मनुष्यत्व की अनुभूति करें l हम शक्ति का अवबोध करें l इससे धीरे-धीरे हमारे भीतर सद्गुणों का विकास होगा और हमारा जीवन अधिक श्रेष्ठ बन जाएगा।


प्रातः प्रयास हो तनिक आत्मदर्शन के हित, 

हो जाएँगे जगती के सब सद्गुण अन्वित ॥


अद्भुत है भारत l हमारे देश में शिव, राम और कृष्ण का व्यापक प्रभाव है इनकी दिव्य लीलाएँ सतत चल रही हैं, जो मानव जीवन को दिशा और प्रेरणा दे रही हैं l सांसारिकता में जो बहुत लिप्त हैं उन्हें ये सब दिखाई नहीं देता l जब मन केवल भौतिक विषयों, इच्छाओं और मोह में उलझा रहता है, तब वह सूक्ष्म सत्य, भक्ति और दिव्यता को अनुभव नहीं कर पाता l इसी कारण हमें संसार से इतर भी अपना चिन्तन रखना चाहिए l आत्मदर्शन में हमें यही प्रतीत होता है कि जो हम हैं वही सब हैं l


राम कथा अद्भुत है 


जेहिं यह कथा सुनी नहिं होई। जनि आचरजु करै सुनि सोई॥

कथा अलौकिक सुनहिं जे ग्यानी। नहिं आचरजु करहिं अस जानी॥

रामकथा कै मिति जग नाहीं। असि प्रतीति तिन्ह के मन माहीं॥

नाना भाँति राम अवतारा। रामायन सत कोटि अपारा॥


जो ज्ञानीजन हैं, वे इस अलौकिक कथा को सुनकर आश्चर्य नहीं करते, क्योंकि वे इसके दिव्य स्वरूप को भली-भाँति जानते हैं।

उनके मन में यह दृढ़ विश्वास होता है कि राम की कथा की कोई सीमा नहीं है  अर्थात् उसकी महिमा अनंत है l

इसके अतिरिक्त सूक्ष्म भाव कब समझ में नहीं आते, कौन विपन्न हैं, रामायण धारावाहिक की चर्चा क्यों हुई,संगठन क्यों महत्त्वपूर्ण है जानने के लिए सुनें l