8.3.24

आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का फाल्गुन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी विक्रमी संवत् २०८० तदनुसार 8 मार्च 2024 का सदाचार संप्रेषण ९५३ वां सार -संक्षेप

 प्रस्तुत है उद्यमभृत् ¹  आचार्य श्री ओम शङ्कर जी का आज फाल्गुन कृष्ण पक्ष त्रयोदशी विक्रमी संवत् २०८० तदनुसार 8 मार्च 2024 का  सदाचार संप्रेषण 

  ९५३ वां सार -संक्षेप

1 घोर परिश्रम करने वाला


विषम परिस्थितियों में घोर परिश्रम करते हुए आचार्य जी नित्य हम भारत भक्तों को प्रेरित करते हैं यह ईश्वर की बहुत बड़ी कृपा है

यह सदाचारमय विचारों का संप्रेषण हमारे मानव जीवन, समाज -जीवन, संपूर्ण विश्व को सन्मार्ग दिखाने वाले भारत की संस्कृति के उत्थान और प्रसार के लिए अत्यन्त उपयोगी है इन सदाचार संप्रेषणों से हमारे अन्दर रामत्व प्रवेश कर सकता है   ये ऐसा सामर्थ्य दे सकते हैं कि हम प्रतिकूल विषम परिस्थितियों को भी अपने अनुकूल बना लें जिस प्रकार भगवान् राम ने प्रतिकूल परिस्थितियों को अनुकूल बनाया अपने लक्ष्य से डिगे नहीं

ऐसे प्रभु राम वन्दनीय हैं


आपदामपहर्तारं दातारां सर्वसम्पदाम्।

लोकाभिरामं श्रीरामं भूयो भूयो नामाम्यहम्॥१॥



जीवन की सभी प्रकार की प्रतिकूल परिस्थितियों को जो अनुकूल बनाता है और पीड़ा को दूर करता है, जो सभी तरह के पक्ष, सम्मान और धन को प्रदान करता है, जिसे देखकर, संसार अत्यन्त प्रसन्नता का अनुभव करता है, उन श्रीराम के लिए, मैं बार-बार अपना सिर झुकाता हूं।


रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे।

रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः॥२॥




आइये प्रवेश करें आज की वेला में


आचार्य जी ने परामर्श दिया कि समाजोन्मुखी व्यक्तित्व के लक्षण उदारता, कर्मशीलता,सामर्थ्य, उत्साह नई पीढ़ी में प्रविष्ट हो सकें इसके लिए उनसे आत्मीयता प्रकट करें उनकी जिज्ञासाएं शान्त करें किन्तु अनावश्यक रूप से उन्हें उपदेशित न करें


हम निजी कार्यों के साथ समाज के कार्यों के लिए भी कुछ समय निकालें


लखनऊ अधिवेशन की तैयारी में क्या कर रहे हैं उसे बताते चलें ताकि उत्साह बढ़ता चले

अपने अपने घरों में पूजा पाठ का सस्वर विधान करें 


इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने भैया मलय जी और उनके पुत्र भैया अभिजात जी की चर्चा क्यों की भैया मनीष कृष्णा जी भैया अरविन्द जी का उल्लेख क्यों हुआ  अरुण गोविल किस संदर्भ में आए जानने के लिए सुनें