26.4.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज वैशाख शुक्ल पक्ष दशमी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 26 अप्रैल 2026 का सदाचार संप्रेषण *१७३१ वां* सार -संक्षेप

 कह बाली सुनु भीरु प्रिय समदरसी रघुनाथ। 

जौं कदाचि मोहि मारहिं तौ पुनि होउँ सनाथ ll 


बालि कहता है—हे प्रिय (सुग्रीव)! सुनो, भगवान् श्रीराम समदर्शी हैं, वे सबके प्रति समान भाव रखते हैं। यदि वे किसी प्रकार मुझे मार भी दें, तो भी मैं पुनः सनाथ  हो जाऊँगा अर्थात् उनका आश्रय पाकर मेरा कल्याण ही होगा।


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज वैशाख शुक्ल पक्ष दशमी विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 26 अप्रैल 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१७३१ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं २१३


अपने अहं को त्यागकर सामूहिक शक्ति से जुड़ने, राष्ट्र और समाज के लिए समर्पित होने तथा मिलकर आगे बढ़ने का संकल्प लें 


संगठन सूत्र में मचल-मचल हम आज पुनः बंधते जाते...


आज कल हम लोग उन तुलसीदास जी जिन्हें भगवान् राम का वह स्वरूप प्रिय है जो भक्तों की रक्षा करे, दुष्टों का नाश करे और समाज में धर्म की स्थापना करे, कृत श्रीरामचरित मानस के किष्किन्धा कांड में प्रविष्ट हैं कथा तो अत्यन्त रोचक और मोहक है इससे हमें शिक्षा भी मिल रही है 


बालि परम हित जासु प्रसादा। मिलेहु राम तुम्ह समन बिषादा॥

सपनें जेहि सन होइ लराई। जागें समुझत मन सकुचाई॥10॥


यहां बालि के अप्रतिम बल और प्रभाव को दिखाया गया है, साथ ही यह भी कि कभी-कभी विपरीत परिस्थितियाँ (जैसे बालि का अत्याचार) भी अंततः ईश्वर से मिलाने का माध्यम बन जाती हैं।


सुग्रीव का विरक्त हो जाना 

(अब प्रभु कृपा करहु एहि भाँति। सब तजि भजनु करौं दिन राती॥)

वास्तव में कथा की गति को प्रभावित करता क्योंकि वही सेतु बनते हैं जिनके माध्यम से हनुमान का मिलन भगवान् राम से होता है और आगे सीता की खोज तथा रावण वध की पूरी योजना आगे बढ़ती है। इस दृष्टि से, यदि सुग्रीव पूरी तरह विरक्त होकर भजन में ही लग जाते, तो कथा का स्वरूप अवश्य परिवर्तित हो जाता।   ( प्रभु राम तो लीला करने के लिए अवतरित हुए हैं उनकी लीला भंग हो जाएगी यदि सुग्रीव ज्ञानी हो जाएंगे )


ये प्रसंग अद्भुत हैं इन्हें प्रयासपूर्वक जानकर यदि इनसे हम अपने विचार अनुस्यूत कर लें और अपनी संतानों को   इनसे अवगत कराएं तो निश्चित रूप से वे मेधासंपन्न शक्तिसम्पन्न बन सकते हैं 

इसके अतिरिक्त जयशंकर प्रसाद की चर्चा क्यों हुई,  कथा में तारा ने क्या समझाया जानने के लिए सुनें