8.5.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष षष्ठी /सप्तमी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 8 मई 2026 का सदाचार संप्रेषण *१७४३ वां* सार -संक्षेप

 प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष षष्ठी /सप्तमी विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 8 मई  2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१७४३ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं २२५

सांसारिक प्रपंचों के बीच अपने आत्मबोध को बनाए रखें व्यामोह भ्रमित न करे इसका भी ध्यान रखें किसी भी परिस्थिति में लक्ष्य ओझल न करें l


भगवान् राम ने सामान्य जनों में ऐसी भावना जाग्रत की कि उनका व्यक्तित्व समाजोन्मुखी बन गया।

हमने भी राष्ट्रनिष्ठा से परिपूर्ण समाजोन्मुखी व्यक्तित्व के उत्कर्ष को अपना लक्ष्य बनाया है। इसकी निरन्तर समीक्षा करते रहना चाहिए।

हमें ऐसा समाजोन्मुखी व्यक्तित्व विकसित करना चाहिए, जिसमें राष्ट्र के प्रति निष्ठा, समाज के प्रति संवेदनशीलता, कर्तव्य के प्रति समर्पण तथा लोकमंगल की भावना विद्यमान हो। स्वार्थ से ऊपर उठकर समाज के हित में सोचने और कार्य करने की भावना ही समाजोन्मुखता है l यह हमारे आन्तरिक पराक्रम को भी प्रकट करती है l यह एक ऐसा दृष्टिकोण, विचार और आचरण है जिसमें व्यक्ति केवल अपने हित तक सीमित न रहकर समाज के कल्याण, उन्नति और सुख-दुःख के प्रति भी सजग एवं उत्तरदायी रहता है l 


समाज की दिशा में अग्रसर होने के लिए श्री रामचरित मानस एक उत्कृष्ट साधन है जिसके किष्किन्धा कांड में आजकल हम लोग प्रविष्ट हैं l

बचन सुनत सब बानर जहँ तहँ चले तुरंत ।

तब सुग्रीवँ बोलाए अंगद नल हनुमंत॥22॥


सुनहु नील अंगद हनुमाना। जामवंत मतिधीर सुजाना॥

सकल सुभट मिलि दच्छिन जाहू। सीता सुधि पूँछेउ सब काहू॥


सुग्रीव ने मां सीता को दक्षिण दिशा में जाते देखा है l

मानस अद्भुत ग्रंथ है 


रावण का अन्याय और अत्याचार भीषणतम स्वरूप धारण कर चुका था।

उसका अहंकार, अधर्म और शक्ति का दुरुपयोग समस्त लोकों के लिए भय और पीड़ा का कारण बन गया था।

ऋषि-मुनियों के यज्ञ बाधित हो रहे थे, धर्म संकट में था और सज्जन समाज आतंकित था।

ऐसे समय भगवान् राम ने धर्म, मर्यादा और लोककल्याण की स्थापना हेतु रावण के अत्याचार का अंत किया।  इससे हमें यही प्रेरणा प्राप्त होती है कि हमें भी अपने राष्ट्र के प्रति अनुराग रखना चाहिए जिस प्रकार भगवान् राम ने रखा 



इसके अतिरिक्त भैया आशीष जोग जी, भैया सिद्धनाथ जी गुप्त, भैया डा अमित गुप्त जी,  भैया राजेन्द्र गुप्त जी,दीनदयाल विद्यालय कार्यालय से संबन्धित राजेन्द्र जी,श्री रामचन्द्र पांडेय जी, श्री अरिन्दम जी की चर्चा क्यों हुई, काडर किसमें प्रविष्ट हो गया जानने के लिए सुनें l