"अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के पावन अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएँ। योग के माध्यम से आप स्वस्थ शरीर, प्रसन्न मन तथा संतुलित जीवन प्राप्त करें, यही मंगलकामना है।"
प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष सप्तमी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 21 जून 2026 का सदाचार संप्रेषण
*१७८७ वां* सार -संक्षेप
मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं २६९
हमारा संगठन चरित्रसम्पन्न युवाओं का संगठन है। अतः इसके सदस्य के रूप में हमें सदैव ऐसा आचरण करना चाहिए जिससे संगठन की प्रतिष्ठा बढ़े, देशभक्त सनातनधर्मी समाज का विश्वास दृढ़ हो और राष्ट्रहित की भावना सुदृढ़ हो।
हम सदैव आशान्वित रहें और सकारात्मक दृष्टि बनाए रखें। हम साधक हैं। साधक का कर्तव्य है कि वह साधना-पथ में आने वाली विविध शक्तियों, तत्त्वों, विधियों अथवा व्यवस्थाओं में उलझकर अपना ध्यान विचलित न होने दे। उसका चित्त केवल अपने साध्य पर केन्द्रित रहे। जब लक्ष्य के प्रति निष्ठा और विश्वास दृढ़ होता है, तब मार्ग की बाधाएँ स्वयं गौण हो जाती हैं और साधना निरन्तर प्रगति की ओर अग्रसर होती है।हमारे विचार सनातन धर्म के शाश्वत सिद्धान्तों, जैसे धर्म, करुणा, संयम, सेवा,शौर्य, पराक्रम,सदाचार और आत्मोन्नति पर आधारित रहें । हम क्षणिक प्रवृत्तियों के स्थान पर कालातीत मूल्यों को महत्व दें हम संसार को केवल अपने हित की दृष्टि से नहीं, बल्कि समस्त प्राणियों के कल्याण की दृष्टि से देखें l पीड़ित, शोषित एवं सताए हुए भारतदेश के भक्तों के संरक्षण और कल्याण के लिए समर्पित रहें यह ध्यान रखें कि प्रतिघात के बिना शत्रु भयभीत नहीं होता। हम जाग्रत हों अपने धर्म, संस्कृति और राष्ट्र के गौरव की रक्षा के लिए सजग, संगठित और समर्थ बनें l रामत्व की अनुभूति करें l
भगवान् राम क्या हैं,
लव निमेष परमानु जुग, बरष कलप सर चंड।भजसि न मन तेहि राम कहँ, कालु जासु कोदंड॥
का उल्लेख करते हुए आचार्य जी ने परमाणु, अणु, त्रसरेणु,त्रुटि, लव, वेध, निमेष, काष्ठा आदि का विस्तृत निरूपण किस प्रकार किया, यदि शिक्षित को उचित शिक्षा मिली होगी तो वह कैसा कैसा नहीं होगा जानने के लिए सुनें