तिफ़्ल में बू आए क्या माँ बाप के अतवार की
दूध तो डिब्बे का है तालीम है सरकार की
प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष अष्टमी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 22 जून 2026 का सदाचार संप्रेषण
*१७८८ वां* सार -संक्षेप
स्थान :शारदा नगर कानपुर
मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं २७०
युगभारती एक वैचारिक संगठन है। अतः इसके सदस्य के रूप में हमें अपने विचारों की दृढ़ता, आचरण की शुचिता और लक्ष्य के प्रति अटूट विश्वास के साथ निरन्तर आगे बढ़ते रहना चाहिए l हमें ऐसी शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना चाहिए जो मनुष्य को केवल जीविकोपार्जन का साधन न बनाए, अपितु उसे शक्तिसम्पन्न, चरित्रवान, आत्मनिर्भर, राष्ट्रनिष्ठ और मानवता के प्रति संवेदनशील बनाए। साथ ही वह ऐसी विवेकपूर्ण दृष्टि भी प्रदान करे, जिससे वह कालनेमियों को पहचान सके और उन्हें उचित दण्ड देने का सामर्थ्य रख सके l
सनातन धर्म की आर्ष चिन्तना और विधि व्यवस्था अद्भुत है l जो कुछ भी होता है, वह परमात्मा की ही प्रेरणा और व्यवस्था से होता है। सीमित बुद्धि के कारण हम अनेक घटनाओं का तात्कालिक कारण तो देख लेते हैं, पर उनके दूरगामी परिणामों को नहीं समझ पाते। परमात्मा सर्वज्ञ, सर्वहितकारी और करुणामय है, अतः वह जो भी करता है, उसमें किसी न किसी रूप में हमारा कल्याण निहित होता है। इसलिए सुख में अहंकार और दुःख में निराशा के स्थान पर हमें श्रद्धा, धैर्य और विश्वास बनाए रखना चाहिए।
यह अविश्वास का अंधकार है आत्मदीप हो जाओ.....
(अपने दर्द मैं दुलरा रहा हूं )
अविश्वास का अर्थ केवल ईश्वर पर विश्वास का अभाव नहीं है, स्वयं पर, अपने कर्तव्य पर, अपने लक्ष्य पर और जीवन के दिव्य उद्देश्य पर से विश्वास खो देना भी अविश्वास ही है। जब हम बार-बार की असफलताओं, विपरीत परिस्थितियों या दूसरों के व्यवहार से निराश होकर अपने भीतर की शक्ति को भूल जाते हैं , तब हमारे जीवन में अन्धकार छा जाता है।
हम अपने भीतर स्थित चेतना, विवेक, श्रद्धा और आत्मबल को जाग्रत करें l जिस प्रकार दीपक स्वयं जलकर अपने आसपास का अन्धकार दूर करता है, उसी प्रकार हमें अपने भीतर ज्ञान, विश्वास और पुरुषार्थ का दीप प्रज्वलित करना चाहिए।
भगवान बुद्ध का प्रसिद्ध उपदेश "अप्प दीपो भव" (स्वयं अपना दीपक बनो) भी इसी सत्य की ओर संकेत करता है।
इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने अरुण योगीराज का नाम क्यों लिया भैया विभास जी का उल्लेख क्यों हुआ मानस में आज आचार्य जी ने क्या बताया जानने के लिए सुनें