लूम लपेटि, अकास निहारि कै, हाँकि हठी हनुमान चलाए।
सूखि गे गात, चले नभ जात, परे भ्रमबात, न भूतल आए।
(कवितावली )
हनुमानजी के अप्रतिम बल, पराक्रम और युद्धकौशल का अत्यन्त प्रभावशाली निरूपण
प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज आषाढ़ कृष्ण पक्ष द्वादशी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 11 जुलाई 2026 का सदाचार संप्रेषण
*१८०७ वां* सार -संक्षेप
मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं २८९
श्रीरामचरितमानस का अध्ययन करके अपने भीतर शक्ति, भक्ति, विवेक, विनय और सदाचार का विकास करें।
हीन चिन्तन से ग्रस्त कुछ लोग भगवान श्रीराम को मात्र कल्पना मानते हैं। किन्तु भगवान श्रीराम
सात्विक यज्ञों में रत हम भारत, भारतीयता और सनातनत्व के उपासकों के लिए धर्म, मर्यादा, सत्य और आदर्श जीवन के शाश्वत प्रतीक हैं।गोस्वामी तुलसीदास जी के अनुसार श्रीराम परब्रह्म हैं, परम सत्य हैं, इन्द्रियों से परे, अलक्ष्य, अनादि और अनुपम हैं। उनका चरित्र मानवता के लिए आदर्श है l
तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस का गम्भीर अध्ययन केवल कथा का रसास्वादन नहीं, बल्कि आत्मशक्ति का जागरण है।
मानस की प्रत्येक चौपाई, प्रत्येक प्रसंग और प्रत्येक तथ्य पर सूक्ष्म दृष्टि डालने से जीवन के गहन सत्य उद्घाटित होते हैं। इससे हमारे भीतर आत्मविश्वास, धैर्य, विवेक और धर्मनिष्ठा का विकास होता है।
हमारा वास्तविक संघर्ष बाहर के शत्रुओं के साथ साथ अपने भीतर के विकारों काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद और मत्सर से चलता है।मानस का मनन इस अन्तर्द्वन्द्व को शांत कर मन में सद्विचारों की विजय स्थापित करता है। जब अन्तःकरण निर्मल होता है, तब आत्मशक्ति प्रकट होती है सद्बुद्धि प्राप्त होती है और जीवन की बाहरी चुनौतियों का सामना करना भी सरल हो जाता है l
हम संसार को संस्कारित करने का उपक्रम लेकर चले हैं
राष्ट्रविरोधी तत्त्वों से हमें अपने राष्ट्रभक्त समाज की रक्षा करनी हैं उसे अवगत कराना है कि केवल अंधकार ही नहीं है उसे भ्रममुक्त भयमुक्त करना है
हमने अपने लक्ष्य बनाएं हैं
वयं राष्ट्रे जागृयाम पुरोहिताः
राष्ट्र -निष्ठा से परिपूर्ण समाजोन्मुखी व्यक्तित्व का उत्कर्ष
इसके अतिरिक्त
बैरिस्टर साहब ने केवल पानी पीने के लिए क्यों कहा,एक आचार्य श्री कोहली जी की चर्चा क्यों हुई,आज किस विद्यालय में शिक्षकों का साक्षात्कार है जहां आचार्य जी जा रहे हैं,
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