25.7.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 25 जुलाई 2026 का सदाचार संप्रेषण *१८२१ वां* सार -संक्षेप मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३०३

 प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 25 जुलाई 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१८२१ वां* सार -संक्षेप

मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३०३

हमारा संकल्प हो कि जीवन का प्रत्येक क्षण कर्ममय बने। तब आयु हमें नहीं रोकेगी, परिस्थितियाँ हमें नहीं झुकाएँगी और अंतिम श्वास तक हम कर्तव्यपथ पर अविचल चलते रहेंगे।




शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलम्बन और सुरक्षा—इन चार आधारभूत आयामों को केन्द्र में रखकर हमारी संस्था युगभारती, जिसके लिए प्रेम और आत्मीयता अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है, व्यक्ति, परिवार,समाज और भारत राष्ट्र,जहां अनगिनत महापुरुषों ने निष्काम कर्मयोगी बनकर अपने त्याग, तप,  परिश्रम, शौर्य, पराक्रम और बलिदान से  वैभव, गौरव और विश्वगुरु के पद पर प्रतिष्ठित किया,के सर्वांगीण विकास हेतु कार्य और व्यवहार के स्तर पर सतत आगे बढ़ रही है। हमारा प्रयास केवल विचार देने तक सीमित नहीं, बल्कि उन्हें जीवन में उतारकर व्यक्ति, परिवार,समाज  और राष्ट्र को सशक्त, संस्कारित तथा आत्मनिर्भर बनाना है। इन्हीं चार स्तम्भों के आधार पर हम अत्यन्त पवित्र उद्देश्य के साथ निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर हैं।

हमारा प्रयास मनुष्यत्व से ईश्वरत्व की ओर आरोहण का है। यह मार्ग आत्मसंयम, सदाचार, सेवा, त्याग और लोकमंगल से प्रशस्त होता है। किन्तु जो व्यक्ति, संस्था, दल या विचारधारा समाज में विभाजन, स्वार्थ, हिंसा, घृणा अथवा नैतिक पतन को बढ़ावा दे रही हो वह राष्ट्रसेवा के आदर्श को  चरितार्थ नहीं कर सकती। यह सदैव हम ध्यान में रखें l


श्रीरामचरितमानस में धर्मरथ वाला प्रसंग अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है 

धर्मरथ हमारी शक्ति और भक्ति का आधार है l हनुमान जी  जो निश्चिन्त और निष्काम भक्त हैं और जिनके जीवन में दुविधा का कोई स्थान नहीं, से इतर विभीषण दुविधाग्रस्त भक्त हैं तभी वे प्रश्न करते हैं 

रावनु रथी बिरथ रघुबीरा। देखि बिभीषन भयउ अधीरा॥ अधिक प्रीति मन भा संदेहा। बंदि चरन कह सहित सनेहा॥१ll 

इसका क्या उत्तर मिलता है इसकी प्रतीक्षा हम कल तक करें 


और इसके अतिरिक्त किस प्रकार के शिक्षकों की आवश्यकता है भैया पुनीत जी और भैया अजीत जी का उल्लेख क्यों हुआ, उन्नाव विद्यालय में इस समय कौन से कार्य चल रहे हैं जानने के लिए सुनें