30.8.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज भाद्रपद कृष्ण पक्ष द्वितीया /तृतीया विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 30 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण *१८५७ वां* सार -संक्षेप मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३३९

 प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज भाद्रपद कृष्ण पक्ष द्वितीया /तृतीया विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 30 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१८५७ वां* सार -संक्षेप 


मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३३९

समाज-सेवा का वास्तविक अर्थ केवल दूसरों के लिए कार्य करना नहीं, बल्कि आत्मबोध, आत्मबल, आत्मज्ञान और आत्मतत्त्व के परिचय से प्राप्त आनन्द में निरन्तर अपने व्यक्तित्व को ऊर्ध्वगामी बनाना है। जब व्यक्ति स्वयं को भीतर से विकसित करता है, तभी उसकी सेवा समाज के वास्तविक उत्थान का माध्यम बनती है।साथ ही हम लोग शिक्षा पर भी ध्यान केन्द्रित करें l आज 

शिक्षा उचित रीति से देने की आवश्यकता है ताकि व्यक्ति व्यक्ति 

चिन्तनशील बने l




आचार्य जी ने आज शक्ति-सम्पन्न होने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आज के युग का धर्म शक्ति -उपासना है। जिसके पास शक्ति होती है, उसकी बात प्रभावी होती है; अशक्ति को समाज महत्त्व नहीं देता, बल्कि वह उपहास का विषय भी बन सकती है।

जब-जब भारत शक्ति-सम्पन्न रहा, तब-तब विश्व ने उसे गुरु के रूप में स्वीकार किया। किन्तु जब हमारी शक्ति खण्डित हुई, तब हमारा प्रभाव भी क्षीण हुआ। आचार्य जी ने यह भी स्पष्ट किया कि अध्यात्म को भुजबल और सामर्थ्य की शक्ति से अलग कर देना हमारी बड़ी भूल रही है। जब अध्यात्म और शक्ति का संतुलन टूटा, तब अनेक समस्याओं ने हमें घेर लिया।

अतः आज आवश्यकता है कि हम आत्मबल, संगठन-शक्ति, ज्ञान-शक्ति और भौतिक सामर्थ्य—सभी का विकास करें तथा शक्ति का उपयोग लोककल्याण और धर्मरक्षा के लिए करें।

 गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामकथा के माध्यम से शौर्यप्रमंडित अध्यात्म का महत्त्व समझाया l

आज कल हम लोग उत्तरकांड के रामराज्य वाले प्रसंग में प्रविष्ट हैं l रामराज्य तो अद्भुत था आपस में सभी परस्पर प्रेम करते थे समाज में विषमता नहीं थी किसी प्रकार के कष्ट नहीं थे l 


इसके अतिरिक्त आचार्य जी ने आज उन्नाव विद्यालय में होने वाले कार्यक्रम की चर्चा करते हुए हम सभी को उसमें पधारने के लिए स्नेहपूर्वक आमन्त्रित किया। उन्होंने कार्यक्रम के उद्देश्य और उसकी महत्ता पर प्रकाश डालते हुए सभी से सक्रिय सहभागिता का आग्रह किया।

कथा में आचार्य जी ने और क्या बताया परमगति क्या है जानने के लिए सुनें l