29.8.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज भाद्रपद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा /द्वितीया विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 29 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण *१८५६ वां* सार -संक्षेप मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३३८

 प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज भाद्रपद कृष्ण पक्ष प्रतिपदा /द्वितीया विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 29 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१८५६ वां* सार -संक्षेप 


मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३३८


मानस का अध्ययन कर हम अपने भीतर विवेक, मर्यादा, करुणा, धैर्य, त्याग, कर्तव्यबोध, शौर्य, पराक्रम जैसे सद्गुणों का विकास करें 


मनुष्य का जीवन केवल वर्तमान जन्म की कथा नहीं है। उसके व्यक्तित्व, परिस्थितियों और जीवन में घटित होने वाली अनेक घटनाओं के पीछे पूर्वजन्मों के कर्मों और संस्कारों की भी भूमिका मानी गई है। पूर्वकृत कर्म समयानुसार फलित होते हैं और मनुष्य को अपने कर्मों के माध्यम से निरन्तर अपनी भावी गति का निर्माण करने का अवसर मिलता है। हमें जीवन को एक अखंड यज्ञ की तरह समझना चाहिए l इस यज्ञ में हमारा प्रत्येक विचार, प्रत्येक वचन और प्रत्येक कर्म एक आहुति है। 

रामकथा हमें यही सिखाती है कि परिस्थितियाँ चाहे जैसी हों, मनुष्य अपने धर्मपूर्ण कर्म, त्याग, संयम और सदाचार की आहुति देकर अपने जीवन को सार्थक बना सकता है। भगवान राम का चरित्र अवर्णनीय है l उनका व्यवहार अद्भुत है l

रघुपति चरित देखि पुरबासी। पुनि पुनि कहहिं धन्य सुखरासी॥3॥



श्री रघुनाथ जी का यह चरित्र देखकर अवधपुरवासी बार-बार कहते हैं कि सुख की राशि श्री रामचंद्रजी धन्य हैं॥अब भगवान राम का राज्य चल रहा है रामराज्य में दैहिक, दैविक और भौतिक ताप किसी को नहीं व्यापते। सब मनुष्य परस्पर प्रेम करते हैं और वेदों में बताई हुई नीति  में तत्पर रहकर अपने-अपने धर्म का पालन करते हैं l

इसके अतिरिक्त शम्बूक, जो आज की भाषा में paediatrician 

 था,

के विषय में आचार्य जी ने क्या बताया, शास्त्रानुसार शूद्र कौन हैं, राहुल सांकृत्यायन (केदारनाथ पांडेय ),जो हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार, घुमक्कड़, इतिहास-अध्येता, बौद्ध दर्शन के विद्वान और बहुभाषाविद् थे, का उल्लेख क्यों हुआ जानने के लिए सुनें l