14.8.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज श्रावण शुक्ल पक्ष द्वितीया विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 14 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण *१८४१ वां* सार -संक्षेप मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३२३

 इहाँ भानुकुल कमल दिवाकर। कपिन्ह देखावत नगर मनोहर॥

सुनु कपीस अंगद लंकेसा। पावन पुरी रुचिर यह देसा॥1॥


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज श्रावण शुक्ल पक्ष द्वितीया विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 14 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१८४१ वां* सार -संक्षेप 


मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३२३


जीवनपर्यन्त सीखते रहने की जिज्ञासा बनाए रखें, क्योंकि सीखने की प्रक्रिया कभी समाप्त नहीं होती। और सीखने के पश्चात् सिखाने का भाव भी सदैव बनाए रखें ताकि शिक्षकत्व की शक्ति मलिन न हो l अपने संगठन युगभारती में प्रेम और आत्मीयता का विस्तार करें l 





गोस्वामी तुलसीदास जी, जिन्हें ‘कविकुल-कमल-दिवाकर’ कहा गया है, श्रीरामचरितमानस के माध्यम से यह संदेश देते हैं कि परिवार-भाव अत्यन्त अद्भुत और जीवनदायी होता है। यदि कभी मन में किसी प्रकार का विकार उत्पन्न हो जाए, तो उसे द्वेष या वैमनस्य से नहीं, बल्कि सद्विचारों के द्वारा दूर करना चाहिए। परिवार और संगठन इसी भाव पर टिके रहते हैं।

रामकथा हमें यह संकेत भी देती है कि रामत्व क्या है और रावणत्व क्या है। रामत्व में अपने आत्म को परमात्मतत्त्व में समर्पित कर देना लक्ष्य है l रामत्व में विद्या ज्ञान के लिए धन दान के लिए और शक्ति रक्षा के लिए है रावणत्व में  विद्या वादविवाद के लिए, धन मद पैदा करने के लिए और शक्ति दूसरों को कष्ट देने के लिए है साथ ही रावणत्व में निजहित और अहङ्कार की प्रधानता है, जबकि रामत्व में समष्टि, समन्वय और संगठन का भाव है। रावण के पक्ष में स्वार्थ और विभाजन की प्रवृत्ति दिखाई देती है; इसके विपरीत  प्रभु श्रीराम बिखरे हुए समाज को एक सूत्र में पिरोते हैं। वनवासी आदि विभिन्न समुदायों को साथ लेकर वे एक संगठित शक्ति का निर्माण करते हैं और इसी सामूहिक शक्ति तथा संगठन-भाव के द्वारा रावण का पराभव करते हैं। अकबर के शासन के कारण उपजी विषम परिस्थितियों में तुलसीदास जी ने रामकथा के द्वारा यही संकेत दिया कि संगठन अत्यन्त महत्त्वपूर्ण है l 

कथा में आचार्य जी ने आज क्या बताया 

 आचार्य जी ने बलराज मधोक द्वारा लिखित *पाकिस्तान का आदि और अंत* पुस्तक की चर्चा क्यों की  युगपुरुष दीनदयाल जी का उल्लेख क्यों हुआ जानने के लिए सुनें l