15.8.26

प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज श्रावण शुक्ल पक्ष तृतीया विक्रमी संवत् २०८३ तदनुसार 15 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण *१८४२ वां* सार -संक्षेप मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३२४

 अनर्थ है कि बंधु ही न बंधु की व्यथा हरे,

वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे॥

(मनुष्यता : मैथिली शरण गुप्त )


प्रस्तुत है *आचार्य श्री ओम शङ्कर जी* का आज श्रावण शुक्ल पक्ष तृतीया विक्रमी संवत् २०८३  तदनुसार 15 अगस्त 2026 का सदाचार संप्रेषण

  *१८४२ वां* सार -संक्षेप 


मुख्य विचारणीय विषय क्रम सं ३२४

हम सद्विचारों को ग्रहण करने का सदैव प्रयास करें, ताकि मन में विकार उत्पन्न हों भी, तो सद्विचारों के प्रकाश से उनका शीघ्र निरसन हो जाए।

हम अखण्ड हिन्दू राष्ट्र के उस गौरवशाली स्वरूप का चिन्तन करें , जिसकी प्राचीन धरा का अतीत तेजस्विता, पराक्रम, शौर्य और सांस्कृतिक वैभव से अनुप्राणित रहा है।




संसार की इस विराट् लीला का संचालन किसी अदृश्य शक्ति की विधि-व्यवस्था से हो रहा है। वह शक्ति स्वयं अदृश्य है, पर उसकी व्यवस्था के पदचिह्न सर्वत्र दिखाई देते हैं। हम उन्हीं दृश्य संकेतों के माध्यम से उस अदृश्य सत्ता को समझने और उसे देखने का प्रयास करते हैं। हम मनुष्य के रूप में जन्मे हैं इस कारण हमें मनुष्यत्व की अनुभूति होनी ही चाहिए l हम सौम्य, शिष्ट, सुसंस्कृत, शान्त, सुशील बनें अपनी तृष्णाओं को असीमित न रखें संतुष्ट रहने का प्रयास करें l हम अपने जीवन को सतत उद्यम, पुरुषार्थ और कर्मशीलता से सार्थक बनाएं जैसे भगवान राम ने अपने जीवन को सार्थक बनाया l

इस समय हम उन्हीं की कथा में प्रविष्ट हैं भगवान राम रावण को पराभूत कर अयोध्या पहुंच चुके हैं 


हृदयँ बिचारति बारहिं बारा। कवन भाँति लंकापति मारा॥

अति सुकुमार जुगल मेरे बारे। निसिचर सुभट महाबल भारे॥4॥


माताएं बार-बार हृदय में विचारती हैं कि इन्होंने लंकापति रावण को कैसे मारा? मेरे ये दोनों बच्चे अर्थात् भगवान राम और लक्ष्मण बड़े ही सुकुमार हैं और राक्षस तो ब़ड़े भारी योद्धा और अत्यन्त बली थे

माताओं को अवर्णनीय आनन्द की अनुभूति हो रही है l अयोध्या में सभी लोग प्रसन्न हैं l

भगवान राम का व्यवहार देखिए 

पुनि रघुपति सब सखा बोलाए। मुनि पद लागहु सकल सिखाए॥

गुर बसिष्ट कुलपूज्य हमारे। इन्ह की कृपाँ दनुज रन मारे॥3॥

श्री रघुनाथजी ने सब सखाओं को बुलाया और सबको सिखाया कि मुनि के चरणों में लगो। ये गुरु वशिष्ठ जी हमारे कुलभर के पूज्य हैं। इन्हीं की कृपा से रण में राक्षस मारे गए हैं॥

यह है रामत्व 

इसके आगे आचार्य जी ने क्या बताया आज आचार्य जी कहां जा रहे हैं, भैया मनीष जी ने क्या योजना बनाई जानने के लिए सुनें l